पत्नी अध्यक्ष ने पति का कराया सम्मान...
 
सीताराम ठाकुर।  एक सामाजिक संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष एक राजनेता की पत्नी हैं। पिछले दिनों इस समाज का दीपावली मिलन समारोह आयोजित किया गया। इस मिलन समारोह में संस्था की राष्ट:ीय अध्यक्ष पत्नी ने अपने पति का सम्मान कराया। सम्मान स्वरूप पति को चांदी का मुकुट पहनाया गया। जिस महाशय का यह सम्मान कराया गया, वे एक समय मप्र के सीएम रहे हैं और अब केंद्र की राजनीति में भी उनकी धाक बरकरार है, उस समय सरकार में पत्नी की खूब चलती थीं। ‘मामा’ने चांदी का मुकुट लौटाते हुए कहा-यह मुकुट आपके प्रेम की अमूल्य निधि है, लेकिन मेरी इच्छा है कि इसे गरीब बेटियों के विवाह में बिछौड़ी बनवाकर उनके पैरों में पहनाया जाए, ताकि ‘मामा’ का सिर हमेशा बेटियों के चरणों में झुका रहे। वैसे कार्यक्रम में अन्य समाजसेवियों का भी सम्मान हुआ। लेकिन दिलजले कहते सुने गए कि वहां रे ‘मामा’समाज में भी अपनी धाक बरकरार रखने में कामयाब हो गए? 

हटाने के बाद भी जमे पर्यावरण प्रेमी  

पर्यावरण से जुड़ी एक संस्था के अध्यक्ष ने करीब 243 अनुमतियां देने के मामले में तीन आईएएस अफसरों पर सीधे-सीधे आरोप लगाए थे। विवाद इतना बड़ा की, विभाग के तत्कालीन पीएस को चलता कर दिया गया। वैसे पर्यावरण संस्था के अध्यक्ष भी पूर्व आईएएस हैं और यह लड़ाई पूर्व और वर्तमान आईएएस को लेकर हुई। इस मामले में संस्था के दो वैज्ञानिको को हटा दिया गया था। वैसे अब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और डायरेक्टर रही महिला आईएएस को भी बाद में हटा दिया गया था, लेकिन जिन दो वैज्ञानिको को हटाया गया था, उनमें से एक आलोक नायक फिर से संस्था में सक्रिय हो गए हैं। वे वर्तमान में पर्यावरण संस्था के सदस्य सचिव को सलाह देने का काम कर रहे हैं। यानि फिर पर्यावरण अनुमति देने में कोई बड़ा खेल होने की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। अब देखना ये है कि इसकी चपेट में कौन-कौन आता है। 

आईएएस ने कहा-बिल्डिंग से फेंक दूंगा 

प्रदेश के शहरों का विकास की जिम्मेदारी उठाने वाली संस्था में इन दिनों तूफान आया हुआ है और उसका कारण है एक सीनियर आईएएस अफसर। उनकी बदजुबानी और व्यवहार की वजह से कई अफसर सदमे में हैं। कुछ ने तो वीआरएस के लिए अप्लाई भी कर दिया है और कुछ छुट्टी पर चले गए हैं। जनाब ने हाल ही एक अफसर से नाराज होकर कहा-तुम्हें बिल्डिंग से नीचे फेंक दूंगा? जब साहब के मुंह से शब्द निकले जैसे किसी ने आत्मसम्मान पर पत्थर मारा हो। अफसर महोदय आहत हुए, ठेस इतनी लगी कि वीआरएस का आवेदन ठोक दिया। पर बदजुबान आईएएस शायद भूल गए कि पद की ऊंचाई पर अगर जुबान फिसल जाए, तो इमारत की नींव हिल जाती है। हम तो बस इतना कहेंगे हुजूर? आईएएस होना खुदा होना नहीं होता। आपकी नीयत अच्छी हो सकती है, पर जब जुबान खराब हो जाए तो अच्छी नीयत भी बदनियत लगती है, इसलिए संभलकर ही अधीनस्थों को सबक सिखाने का काम करें। 

अब आईएएस की जमीन का मामला गरमाया 

नर्मदापुरम से लगे हुए एक जिले के आईएएस अधिकारी जिन्होंने 40 करोड़ का जुर्माना बदलकर 4 हजार कर दिया था, तब वे खूब सुर्खियों में आए। यह खबर छापने वालों को मानहानि का नोटिस देने की धमकी भी दिलाई गई, अब उन्हीं युवा आईएएस महाशय ने राजधानी भोपाल के तालाब कैचमेंट एरिया में जमीन खरीदी है। वह भी उसी पार्टनर के साथ, जो घोटाले के मुख्य बाबू का रिश्तेदार है? काली कमाई का असर यही होता है, इंसान जमीन तो खरीद लेता है, पर जमीन पर टिक नहीं पाता। साहब जमीन खरीदने के बाद इसकी जानकारी सरकार को देना भूल गए, जबकि सिविल सेवा के नियमों में इसका उल्लेख है कि कोई भी भारतीय सेवा का अधिकारी यदि चल-अचल संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो उसे इसकी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य है। अब ईडी और इनकम टैक्स की परछाईं उनकी फाइल पर मंडरा रही है? 
 
वाह एमपी सरकार, इतना ओवलाइज 

झारखण्ड कैडर की एक राज्य सेवा की महिला अधिकारी का मप्र में संविलियन 15 मार्च 2021 को हुआ और मप्र सरकार ने इनका आदेश एक अक्टूबर 2024 को जारी किया। यहां तक सब ठीक है, लेकिन जिसकी नौकरी ही 2016 में झारखण्ड में लगी हो और उसे मप्र की राज्य सेवा में सीनियरिटी का लाभ 14 मार्च 2016 से दे दिया जाए तो आश्चर्य लगता है। यानि महिला अधिकारी पर जीएडी कार्मिक के अफसर इतने मेहरबान है कि किसी भी राज्य से कोई अफसर क्यों न आया हो, बिना परीक्षण, जांच पड़ताल मर्ज करने के बाद सीनियरिटी का लाभ देना इसी सेवा के अफसरों को गले नहीं उतर रहा। वैसे ‘कुमारी’मंत्रालय के एक अफसर खासे मेहरबान हैं, जिसकी चर्चा आयोग तक सुनाई देने लगी है।