होम में बढ़ा महिला अफसरों का रूतबा
होम में बढ़ा महिला अफसरों का रूतबा
सीताराम ठाकुर मप्र सरकार के गृह विभाग में इस समय महिला अफसरों का बोलबाला है। खासकर एक महिला आईपीएस अफसर पहले से ही सचिव बनीं हुई थीं और अब एक और महिला आईएएस को सचिव के पद पर पदस्थ कर दिया है। वैसे एक महिला अपर सचिव के रूप में कार्यरत हैं। अब विभाग में एक ही पुरुष अपर सचिव हैं और वे भी चुनाव में ड्यूटी कर रहे हैं। वैसे विभाग के एसीएस लंबे अवकाश पर चल रहे हैं। पहले एक महीने का अवकाश बीमारी के चलते लिया और बाद में फिर अवकाश ले लिया। इससे लगता है कि उनकी रुचि होम में काम करने की नहीं है। हालांकि विभाग के बारे छवि लगातार बिगड़ती जा रही है। पहले होम में पनिशमेंट के तौर पर अधिकारियों को पदस्थ किया जाता रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि नरसिंहपुर के एक पूर्व कलेक्टर दाल घोटाले में फंसे तो उन्हें गृह सचिव बना दिया। इसी तरह सीहोर के विवादित कलेक्टर को भी हटकार गृह सचिव बना दिया गया। इसके अलावा लोकायुक्त प्रकरण में फंसने के बाद जबलपुर कलेक्टर और धार्मिक विवाद में फंसने पर विदिशा कलेक्टर को भी गृह विभाग में पदस्थ कर दिया गया। इस तरह होम विवादित अफसरों की शरणस्थली बनकर रह गया है?
आईपीएस की सूची का भी इंतजार
मप्र में आईएएस अफसरों की प्रशासनिक सर्जरी के बाद आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर की सूची आने का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है, लेकिन हर बार ये सूची अटक जाती है। वैसे आईपीएस अफसरों की ट्रांसफर सूची तैयार हो गई है। करीब 20 जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं। साथ ही छोटे जिले के एसपी को बडेÞ जिलों की कमान सौंपी जाएगी। अभी तक 2019 बैच के आईपीएस को जिलों में एसपी बनाया जा चुका है। माना जा रहा है कि शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला बदले जा सकते हैं, वहीं छतरपुर, निवाड़ी, बुरहानपुर और नीमच के अलावा दमोह, सिवनी, आगर-मालवा, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर के एसपी बदले जा सकते हैं। साथ ही पीएचक्यू के कई अफसरों को भी इधर से उधर किया जा सकता है। उधर, खेल संचालक अंशुमन सिंह का भी मन वहां नहीं लग रहा है। इसलिए वे भी वापस दिल्ली जाने की जुगाड़ में लगे हुए हैं। इसके बाद डीएसपी की भी भारी-भरकम सूची इंतजार में है।
नायब तहसीलदार को बनाया ओएसडी
मुख्यमंत्री सचिवालय में वैसे तो 10-11 अधिकारी सीएम हाउस से लेकर सचिवालय तक ओएसडी के पद पर पदस्थ हैं। इनमें कुछ बैंक से आए हैं, तो कुछ रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस और राज्य सेवा के अधिकारी हैं, लेकिन एक अधिकारी तो सिर्फ नायब तहसीलदार हैं। इन महाशय के जलबे ‘कविराज’की तरह हैं। वे न तो मीडिया से मिलते हैं और न ही बाहर से आने वाले आगंतुकों से। एक तरह से वे स्वयं को आईएएस अफसर से भी बड़ा अधिकारी मानने लगे हैं। ऐसे ही सीएम सचिवालय में एक अपर सचिव स्तर के अधिकारी जो शिवराज सरकार के समय से पदस्थ हैं, उन्हें भी यह गुमान हो गया था कि वे भी स्वयं को आईएएस से बड़ा मानने लगे थे, लेकिन एक मंत्री से विवाद के चलते और सीएम की गुडलिस्ट में दूसरे रिटायर्ड अधिकारी के आ जाने से उनके ‘पर’ कतर दिए गए हैं। अब उनकी पूछ-परख कम हो गई है, इसलिए वे संघ की अनुशंसा पर आए एक अन्य अधिकारी के कंधे पर बंदूक चलाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। वैसे उनकी भी एंट्री संघ कार्यालय से हुई थी?
अफसरों ने निकाले रिश्वत के नए तरीके
सीधे तौर पर आज के समय में कोई भी अफसर या सरकार पैसा नहीं लेते हैं, बल्कि इसके अलग-अलग माध्यम बन गए हैं। सरकार ने भी अब पोस्टिंग-ट्रांसफर में पैसे लेने के लिए रास्ता खोल दिया है? वैसे इस चर्चित ज्वैलर्स के बारे में प्रशासनिक वीथिकाओं में पहले से नाम लिया जाता रहा है। कई एसीएस-पीएस इसी के माध्यम से काम करते हैं। सबसे अधिक रिश्वत रीयल एस्टेट के माध्यम से ली जाती है, लेकिन अधिकारी कहां बाज आने वाले हैं। वे रोज नए-नए तरीके से रिश्वत ले रहे हैं। सूत्रों के कहना है कि अधिकारी अब कालेधन को पीला कर रहे हैं और ये पैसा भी ज्वैलर्स के माध्यम से लिया जा रहा है और काम के बदले में उससे के्रडिट नोट ले लेता है। जब काम पूरा हो जाता है तो उस के्रडिट नोट के जरिए सोने की खरीदी कर ली जाती है। प्रदेश के कई ब्यूरोक्रेट्स इन दिनों इसी तरीके से रिश्वत ले रहे हैं। गौरतलब है कि जबसे सोने के भाव तेजी से बढ़ने लगे हैं, तभी से अफसरों के दिमाग में यह फार्मूला अपना लिया है। इसके किस्से भी कम नहीं हैं।
अफसरों के अरमान ठंडे पडे
प्रशासनिक वीथिकाओं में जमकर यह चर्चा चल रही है कि बडेÞ साहब अगले महीने दिल्ली जाने वाले हैं? यह चर्चा बाकायदा फैलाई गई थी, जबकि बडेÞ साहब का बीच में पद छोड़कर अभी दिल्ली जाने का कोई प्रोग्राम नहीं है। बडेÞ साहब अपना एक्सटेंशन पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। वैसे दिल्ली दरबार में साहब को ‘नीति’ या आरबीआई से भी बुलावा आ सकता है, लेकिन साहब रिटायरमेंट के बाद भोपाल में रहने का तय कर चुके हैं। इसलिए बडेÞ साहब बनने की दौड़ में शामिल कुछ अफसरों ने यह हवा फैलाई साहब दिल्ली जाने वाले है। अब जल्द बडेÞ साहब बनने का ख्वाब जो अधिकारी देख रहे थे, उनके अरमान ठंडेÞ पड़ते जा रहे हैं। वैसे अगला मुख्य सचिव तो दिल्ली दरबार से ही तय होगा और दिल्ली दरबार में मप्र के अधिकांश अफसरों की पकड़ उतनी मजबूत नहीं है, जितनी दिल्ली में पहले से पदस्थ अफसरों की हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि नया सीएस कौन होगा, दिल्ली से आएगा या फिर मप्र से बनेगा, क्योंकि इसमें अभी चार महीने से अधिक का समय है।

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