चहेते को सौंपा वसूली का काम उल्टा पड़ा
प्रशासनिक -गलियारा
सीताराम ठाकुर
चहेते को सौंपा वसूली का काम उल्टा पड़ा
ग्वालियर-चंबल अंचल से आने वाले एक मंत्रीजी ने अपने एक खास को विभाग में वसूली का काम सौंप दिया था। उक्त व्यक्ति ट्रिपल मर्डर केस में फंसा था। मंत्रीजी के साथ मिलते ही उसने विभाग में सबका जीना मुहाल कर दिया। विभाग के एसीएस हो या अन्य सभी अधिकारियों पर हाबी होने लगा। एक दिन तो वह व्यक्ति मंत्रीजी के कहने पर एसीएस से एक महत्वपूर्ण फाइल लेकर गायब हो गया, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी। उसकी कारतूतों से मंत्रीजी का खजाना तेजी से भरने लगा। बताया जाता है कि उसकी हिम्म्त इस कदर सातवें आसमान पर पहुंच गई कि एक दिन उसने मंत्रीजी के बेटे को ही धमकी दे डाली। तब मंत्रीजी ने उसकी जमकर पिटाई करवा दी। इससे तिलमिलाए चहेते ने हिसाब-किताब मंत्री को सौंपकर उनके विरोधी से जा मिला, जिससे मंत्री जी सहमे हुए हैं? चर्चा ये है कि मंत्रीजी ने जिसे वसूली का काम सौंपा, वहीं अब उनके लिए गले की फांस बन गया है?
भाई से ज्यादा प्यारा साला
प्रदेश के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कुछ समय बाद रिटायर होने वाले हैं, इसलिए वे इस कोशिश में लगे हुए हैं कि इतनी ऊपरी कमाई कर ली जाए, ताकि शेष जीवन रसूख के साथ बीत सके। सूत्रों का कहना है कि साहब इस समय एक ऐसे विभाग में पदसथ हैं, जहां ऊपरी कमाई का कोई हिसाब नहीं रहता है, जो अफसर जितना उठपटांग काम करेगा और करवाएगा, वह उतना कमाएगा। साहब ने इस फॉर्मूेले को अपना लिया है। साहब मूल रूप से एमपी के पड़ोसी राज्य जहां शाहजहां ने मुमताज के लिए महल बनवाया था, के रहने वाले हैं। इसलिए साहब ने उसी राज्य के एक व्यापारी को अपना कुबेर बना दिया है। बताया जाता है कि उसी के माध्यम से साहब अपने मूल राज्य के एक प्रसिद्ध जिले में बडेÞस्तर पर निवेश करवा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि रिटायरमेंट की बेला में साहब काली कमाई करने के लिए इस कदर बेताब है कि सारे कायदे-कानून को ताक में रख दिया है, जिसकी चर्चा मंत्रालय में सुनी जा सकती है।
अब मलाईदार कुर्सी भी नसीब नहीं
राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोशन पाकर आईएएस बने अफसरों के साथ भेदभाव की चर्चा तो रोज सुनाई देती है। हालात यह कि बड़े साहब की मेहरबानी ऐसी बरसी है कि मलाईदार कुर्सियां तो छोड़िए, छोटे पदों पर भी अब प्रमोटी अफसरों की गुंजाइश कम होती जा रही है। आलम यह है कि इन अफसरों को दिए गए विकास प्राधिकरणों और अन्य छोटे संस्थानों में सीईओ जैसे परंपरागत पदों पर यूपीएससी के नए रंगरूटों पर ज्यादा भरोसा किया जा रहा है। कुछ अधिकारी बचे हैं, तो वे भी सरकारी दया पर निर्भर हैं। एक प्रमोटी आईएएस साहब ने अपनी पुरानी सेवा के अफसरों की हालात नहीं देखी गई तो उन्होंने प्रचार-प्रसार वाले विभाग में इस सेवा से एक अफसरों को यहां पदस्थ करवा दिया। फिर क्या, विभाग में भूचाल आ गया। कलमबद्ध हड़ताल शुरू हो गई। फिलहाल राजीनामा हो गया है, लेकिन कभी भी चिंगारी भड़क सकती है। हम तो बस यही कहेंगे कि माहौल ऐसा है कि राज्य सेवा के हित की बात करना ‘शेर के मुंह में हाथ डालने जैसा है।
डिप्टी कमिश्नर के बल्ले-बल्ले
राजधानी भोपाल से लगे हुए एक जिले में एक सहकारिता विभाग के डिप्टी कमिश्नर पदस्थ हैं। उनकी पत्नी भी प्रशासनिक सेवा में हैं, जिसके कारण उन्हें पॉश कॉलोनी में सरकारी बंगला मिला हुआ है। अधिकारी पड़ोसी जिले से रोज अपडाउन करते हैं, क्योंकि उनसे कोई सीनियर पूछने वाला नहीं है कि कब आ रहे हों और कब जा रहे हो। डिप्टी कमिश्नर के घर पर हमेशा चार-पांच लग्जरी वाहनों को जमघट लगा रहता है, जबकि एयरपोर्ट रोड पर उनका स्वयं का मकान है, जिसे किराए पर दे रखा है। साहब की कमाई इतनी हो रही है कि उन्होंने सरकारी बंगले को अपने हिसाब से रहने लायक बनाने के लिए खुद की जेब से 12 से 15 लाख रुपए खर्च कर दिए हैं। डिप्टी कमिश्नर के जलवे देखकर सहकारिता विभाग के अधिकारी उनसे जलने लगे हैं और खुसर-फुसर सुनाई दे रही है कि जल्द लोकायुक्त या ईओडब्ल्यू की जद में डिप्टी कमिश्नर आने वाले हैं?
ससुर की मदद में फंसेंगी कमिश्नर मैडम
एक नगरीय निकाय में नई कमिश्नर मैडम की पारी शुरू हो चुकी है। ईमानदारी ऐसी कि मानो सफेद कपड़े पर एक भी दाग न हो। कहानी राजधानी की पाश कॉलोनी से शुरू होती है, जहां मैडम और उनके पति के मित्र—एक आईपीएस के ससुरजी का बंगला है। पास में ही एक व्यापारी का भी बंगला है। इन दोनों का रिश्ता ऐसा कि ‘दो तलवारें एक म्यान’ में नहीं रह सकतीं। ससुरजी ने व्यापारी को सबक सिखाने के लिए शिकायत ठोंक दी। व्यापारी ने भी कोर्ट से राहत पा ली। पर ससुरजी का जोश कम नहीं हुआ। उन्होंने फिर दामाद के जरिए मैडम तक शिकायत पहुंचा दी। मैडम ने कोर्ट के निर्देश देखे बिना ही व्यापारी को नोटिस दे दिया। व्यापारी जितना सफाई देता गया, मैडम कहती हैं कि नियमानुसार ही कार्रवाई होगी। ज्यादा जोर देने पर कहा कि मुझे भूमि विकास नियम की व्याख्या मत बताइए। दाल गलती न देख व्यापारी आखिर एक वरिष्ठ अफसर के पास पहुंचा। अफसर ने मामले की तह को पकड़ते ही कमिश्नर मैडम को लिख दिया कि यदि अवमानना हुई, तो जवाबदेही आपकी होगी। फिर क्या मैडम ठंडी पड़ गई हैं।

राशिफल 05 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
हर्ष फायरिंग की कीमत: जश्न की गोली ने ली जान, BJP विधायक को मिली सजा
गुजरात दौरे पर पीएम मोदी का बड़ा दावा, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ी ताकत
शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप, शिक्षिका की मौत मामले में वकील पर केस
बिहार में न्याय व्यवस्था होगी और तेज, सम्राट चौधरी सरकार का अहम फैसला
महिला के पेट पर लात मारने का आरोप, 6 माह की गर्भावस्था में जुड़वा बच्चों की मौत