सीएस ने नहीं दी कर्मचारियों को तवज्जो 

सीताराम ठाकुर, एक महिला आईएएस डायरेक्टर के खिलाफ आंदोलन करने वाले दो विभागों के डायरेक्ट्रेट के अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने एक दिन काम बंद कर आंदोलन किया। अधिकारी संगठन ने इस मामले में महिला डायरेक्टर को हटाने की बात मुख्य सचिव के सामने रखी। सीएस ने इनसे इस मामले का ज्ञापन लेकर कहा कि वे मामले को देखते हैं, लेकिन इसके बाद ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे उसे महिला आईएएस को हटाया गया हो? गौरतलब है कि उक्त महिला आईएएस के खिलाफ विभाग के प्रमुख सचिव के इशारे पर यह प्रायोजित आंदोलन किया गया। जिसमें महिला अपर संचालकों ने महिला आईएएस के खिलाफ आरोप लगाए और आहार अनुदान का पैसा जिलों को आवंटित नहीं करने सहित धमकी दिए जाने के भी आरोप लगाए। वैसे इस मामले की वास्तविकता सीएस को एक दिन पहले ही लग चुकी थी, इसलिए उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों की मांग पर तवज्जो नहीं दी? वैसे इस खेल में पूर्व के डायरेटर की भूमिका भी कम नजर नहीं आ रही है। 

 प्रभारी सीई को चार-चार जिम्मेदारी 

पीडब्ल्यूडी विभाग में जितने भी कारनामे हो रहे हैं, उनकी संख्या में कमी होती नजर नहीं आ रही। सरकार ने बीपी बौरासी को प्रभारी चीफ इंजीनियर राष्टÑीय राजमार्ग की जिम्मेदारी आदेश में दी थी, लेकिन इसके अलावा उनके पास प्रभारी सीई एनडीबी, डायरेक्टर एमपीआरडीसी और चीफ इंजीनियर ट्रेनिंग का प्रभार दे रखा है। यानि एक अधीक्षण यंत्री स्तर के अधिकारी को चार-चार चीफ इंजीनियर की कमान सौंप रखी है। हालांकि सीई ट्रेनिंग के रूप में फोल्डर छपवाने और ट्रेनिंग देने के नाम पर 40 लाख रुपए खर्च किए जाने का भी खुलासा हुआ है। अब ये पैसा कहां पर खर्च किया गया, ये तो वे ही जाने, लेकिन लोक निर्माण विभाग के अधिकारी ट्रेनिंग के नाम पर होने वाली बर्बादी को लेकर दुखी नजर आ रहे हैं? वहीं लूपलाइन में पदस्थ किए गए एक सीई के पास कोई काम नहीं होने और प्रदेश में कार्यपालन यंत्रियों को प्रभारी चीफ इंजीनियर बनाए जाने पर भी सवाल उठने लगे है? आरोप है कि क्या ये सब उच्च स्तर के निर्देश पर हो रहा है या फिर मंत्री अपनी मनमर्जी से दागी इंजीनियरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने में लगे हुए है? 

 जिलों से बांध दिया अफसर ने हफ्ता 

 रजिस्ट्रार एवं पंजीयन संचालनालय में पदस्थ एक अफसर ने जिलो में होने वाली गड़बड़ी और भ्रष्टाचार पर अपनी आंखे बंद करने के लिए जिलों में पदस्थ सहायक आयुक्त, जिला पंजीयक आदि अधिकारियों से हफ्ता बांध दिया है। अब किसी भी जिले में रजिस्ट्री, पंजीयन में भ्रष्टाचार, गड़बड़ी और अनियमितता होने पर वर्तमान में पदस्थ फील्ड के अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। चाहे कितनी भी शिकायतें फील्ड की मिलती रहे, लेकिन संचालनालय में बैठे अफसर न तो मामले की जांच करेंगे और न ही फाइल इंचार्ज तक भेजेंगे? क्योंकि ऐसे मामलों को दबाने के लिए उन्होंने जिलों के अफसरों से जो हफ्ता बांध लिया है। इस मामले में एक डिप्टी रजिस्ट्रार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं और डिप्टी रजिस्ट्रार की शिकायत सीएस स्तर तक पहुंच गई है। लेकिन उच्च स्तर तक सबूत नहीं पहुंचने से फील्ड और मुख्यालय के अधिकारी मिलकर बारे-न्यारे करने में लगे हुए हैं। अब प्रमुख सचिव को ही इस मामले में कोई कार्रवाई करनी होगी? 

 फर्जी जाति, अफसर को क्लीनचिट?

राजधानी परिक्षेत्र में पदस्थ रहे एक चीफ इंजीनियर का जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने की शिकायत एससी डिपार्टमेंट से एक शिकायतकर्ता ने की। मामले की जांच छानबीन समिति तक पहुंची। क्लीनचिट लेने के लिए इंजीनियर ने ऐड़ी से चोटी तक ताकत लगा डाली, लेकिन विभाग के तत्कालीन छानबीन समिति के अध्यक्ष और पीएस ने फाइल पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। पीएस का विभाग बदला और दूसरे पीएस ने उक्त अधिकारी के फर्जी जाति प्रमाण पत्र को क्लीनचिट देने की सहमति दे दी। मामला यहां तक तो ठीक था, लेकिन छानबीन समिति के एक सदस्य ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। इंजीनियर दौड़ा-छौड़ा उसके बंगले पहुंचा और दस पेटी उसे थमा दी, साहब ने उसकी क्लीनचिट पर हस्ताक्षर भी कर दिए, लेकिन अभी तक विभाग से आदेश जारी नहीं हुए, जबकि शिकातकर्ता को भी अधिकारी ने कुछ ले-देकर तैयार कर लिया और सुनवाई के समय शिकायतकर्ता पहुंचा ही नहीं। अब मामला पीएस के पाले में है। चर्चा इस बात की हो रही है कि इंजीनियर अधिकारी ने पीएस को कितनी पेटी की सौगात दी है, जिससे उसे क्लीनचिट देने की तैयारी है। 

 शाही अंदाज में मना अधिकारी का जन्मदिन 

 विद्युत वितरण कंपनी के इंदौर जोन में पदस्थ एक सहायक यंत्री का जन्मदिन शाही अंदाज में मनाए जाने का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में विभाग के कर्मचारी और सहायक यंत्री के चाहने वाले उन्हें हाथी पर बैठाकर ढोल-नगाड़ों के साथ कार्यालय में प्रवेश कराते नजर आ रहे हैं। इसके बाद कार्यालय के बाहर डांस किया गया और 500-500 रुपए के नोटों की गड्डियों जैसी डिजाइन वाले केक को काटकर जन्मदिन का जश्न मनाया जाता है। आमतौर पर रविवार को शासकीय कार्यालयों में अवकाश रहता है, लेकिन इस आयोजन में बड़ी संख्या में कर्मचारी और सहायक यंत्री के परिचित शामिल हुए। इस घटना के बाद भोपाल में बैठे अफसर और इंजीनियर भी जलने लगे हैं और इस मामले की शिकायत उन्होंने पीएस से कर दी है, लेकिन पीएस ने भी अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया है। क्योंकि ये शिकायत खुसर-फुसर के जरिए की गई, लिखित में अभी तक किसी इंजीनियर या एमडी ने सरकार से कोई शिकायत नहीं भेजी है, जिससे इस तरह शाही अंदाज में जश्न मनाने वालों के हौसले बढ़ने की संभावना नजर आ रही है?