प्रशासनिक गलियारा --सीताराम ठाकुर 
कलेक्टर को हटवाने सत्तापक्ष और विपक्ष एक जुट 

मप्र में हाल ही में आईएएस अफसरों के ट्रांसफर हुए थे। इनमें एक महिला कलेक्टर को हटवाने के लिए सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक की जुगलबंदी देखने को मिली है। खासकर इसमें निवाड़ क्षेत्र से आने वाले एक मंत्री ने भी अपनी भूमिका निभाई है। कलेक्टर को हटवाने के लिए ट्रायवल से जुडेÞ फील्ड के अधिकारियों ने करीब 2 करोड़ का चंदा जुटाया और यह चंदा मंत्री के माध्यम से ऊपर तक पहुंचा गया। सूत्र तो यह भी बताते है कि अब एमपी में कलेक्टर की पोस्ट पाने के लिए जिले के कैटेगरी के हिसाब से 2 से लेकर 5 करोड़ तक की वसूली चल रही है। वैसे मनपसंद अफसर को कलेक्टर बनवाने के लिए दलाल भी सक्रिय हैं, जो पैसा भी स्वयं खर्च करने को तैयार बैठे हैं। एक अधिकारी को कलेक्टर बनवाने के लिए एक व्यक्ति ने तो एक करोड़ की राशि भी पोस्टिंग कराने वाली ‘दुकान’ में जमा भी करवा दी है? यानि कलेक्टर की पोस्टिंग कराने के लिए प्रदेश में ‘दुकान’ भी चल रही है, जिसकी चर्चा अब मंत्रालय में भी सुनाई देनी लगी है। 

बडे साहब ने सूची से नाम काटे

मप्र में आईएएस तथा आईपीएस की पोस्टिंग का खेल खूब फल-फूल रहा है। पैसे देकर बिना अनुभवी और जूनियर अधिकारी कलेक्टरी पाने में सफल हो रहे हैं। एक केंद्रीय मंत्री की सिफारिश के बावजूद सीनियर अधिकारी को बड़ा जिला नहीं मिल पाया, बल्कि अधिकारी को छोटा जिले का कलेक्टर बना दिया, जिससे केंद्रीय मंत्री की नाराजगी दूर नहीं हुई। इससे अधिकारी भी काम करने में स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं। ऐसे की एक जिले का कलेक्टरी पाने के लिए एक अफसर ने ‘पोस्टिंग की दुकान’में पैसे भिजवाने की सहमति दे दी थी और डॉक्टर साहब के यहां से सूची में उक्त अधिकारी को ‘फ्ला’ जिले का कलेक्टर बनाने बनाने की मंजूरी मिलने के बाद भी बडेÞ साहब ने अधिकारी का नाम सूची से हटा दिया। डॉक्टर साहब के पास जब सूची पहुंची तो वह भी अपना मत्था पकड़कर रह गए। इससे प्रशासनिक लॉबी में यह संदेश घर कर गया है कि बडेÞ साहब के आगे सरकार के मुखिया की भी नहीं चल रही है। संघ से जूडेÞ सूत्र बताते है कि इस आपस की लड़ाई में किसी एक की छुट्टी होना तय है। 

गुड गर्वनेंस हमारा काम नहीं

गुड गर्वनेंस यानी सुशासन, किसी भी सरकार का अहम कार्य। और यह कार्य किसके जिम्मे होता है, अफसरों पर। लेकिन एक प्रमुख सचिव यह बात मानने के लिए तैयार नहीं हैं। हाल ही में एक मीटिंग में इस विषय पर चर्चा हुई तो उन्होंने दो टूक कह दिया। गुड गर्वनेंस हमारा काम नहीं है। अधीनस्थ कन्फ्यूज हो गए तो उन्होंने पूछा, फिर किसका कार्य है? प्रमुख सचिव गुस्से में तमतमाते हुए बोले- नेताओं का। उनकी बात सुनकर अधीनस्थों ने माथा पीट लिया, बाद में बैठक खत्म हो गई। वैसे ये प्रमुख सचिव हमेशा मीडिया से दूरी बनाकर चलते हैं और एक महिला आईएएस को ज्यादातर समय अपने कक्ष में बिठाकर रखते थे। वैसे उक्त महिला आईएएस की अब जिले में पोस्टिंग हो गई है? हालांकि चर्चा यह भी है कि बड़े साहब की कुदृष्टि इन पर पड़ी हुई है। वे बड़े साहब की डांट सुनने वाले स्थायी समिति के सदस्य हैं और जमीनों की नाप-जोख से जुड़े विभाग के पीएस हैं। वर्तमान में इस विभाग में पांच-पांच आईएएस पदस्थ है, जिसकी खुसर-फुसर चलने लगी है। 

फिर किया राज्य सेवा के साथ भेदभाव

प्रदेश में डॉक्टरों पर कार्रवाई से रिटायर डॉक्टर नाराज हैं। जब छिंदवाड़ा केस में दबाव बढ़ा तो सरकार ने एक आईएएस को हटा दिया। यह आईएएस राज्य सेवा यानी राज्य प्रशासनिक सेवा से प्रमोट होकर आए थे। इसलिए इस सेवा के कुछ लोगों का तर्क है कि यदि इस पद पर आरआर यानी सीधी भर्ती वाले आईएएस होते, तो कार्रवाई नहीं होती। क्योंकि उस आईएएस से ऊपर बैठे सीधी भर्ती के एक भी आईएएस पर सकरार की गाज नहीं गिरी है, जब प्रमोटी को हटाया गया है तो दूसरे आरआर वाले आईएएस पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। हम तो इतना ही कहेंगे कि बड़े साहब को आरआर वाले पसंद हैं, तो हम क्या करें? हटाए गए बेचारे प्रमोटी आईएएस अब तक एक बार भी कलेक्टर नहीं बन पाए हैं और अब बन भी नहीं पाएंगे, क्योंकि जनवरी 2026 में सचिव के लिए प्रमोट हो जाएंगे। वैसे उन्हें सरकार ने एक बार कलेक्टर बनाने का आॅफर दिया था, लेकिन फिर इससे छोटी-छोटी दुकानों से होने वाली बड़ी कमाई बंद हो जाती और इसके चलते उन्होंने कलेक्टर बनने से इंकार कर दिया। अब वे परेशान है कि मैंने क्यो इंकार कर दिया

दुल्हन की तरह पालकी में दी विदाई 

लोकतंत्र में नौकरशाही जनप्रतिनिधियों के साथ पर्दे के पीछे रहकर काम करती रही है। यानी कि विभाग या जिले में जो भी काम हो रहे हैं, उनका श्रेय खुद न लेकर सरकार को दिया जाता रहा है। लेकिन कुछ आईएएस व आईपीएस अफसर मसूरी में पढ़ा यह संदेश सिर्फ दीवारों पर लिखने वाली चीज मानते हैं। यही वजह है कि कोई रील बनाकर अपनी प्रशंसा के कसीदे गढ़वाता है तो कोई मीडिया में सुर्खियां बटोरकर। कुछ ने पीआर के लिए अलग तकनीक अपना रखी है। एक युवा आईएएस अफसर का तबादला हुआ तो जनता ने तुलादान कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। मैडम ने उनकी भावनाओं का सम्मान रखते हुए तुला को प्रणाम किया और इसमें बैठने के लिए प्रेमपूर्वक मना कर सादगी का अहसास कराया। वहीं, उन्हीं के सरनेम वाली सीनियर मैडम का जिले से राजधानी में तबादला भी हुआ। जनता ने उनके कामों को देखते हुए जय-जयकारे लगाए और पुरानी प्रथा अनुसार दुल्हन की तरह पालकी में बैठाकर विदाई दी। जनता के प्रेम पर कोई सवाल नहीं, लेकिन पद की मर्यादा और सादगी पर सवाल तो बनता ही है।