रवि भगत का भाजपा से मोहभंग, प्राथमिक सदस्यता छोड़कर बढ़ाई सियासी चर्चाएं
रायगढ़: छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी राजनैतिक खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर युवा नेता रवि भगत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। रवि भगत का यह त्यागपत्र सोशल मीडिया पर सार्वजनिक होने के बाद से ही राज्य की राजनीति और संगठनात्मक हल्कों में कई तरह की अटकलें और चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सादे कागज पर 3 लाइन में लिखा इस्तीफा, बताया निजी कारण
रवि भगत ने रायगढ़ जिले के लैलूंगा मंडल अध्यक्ष को संबोधित करते हुए सादे कागज पर महज तीन लाइनों का अपना संक्षिप्त इस्तीफा सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने पार्टी नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए लिखा कि संगठन ने उन्हें एक सामान्य कार्यकर्ता से उठाकर इतनी बड़ी पहचान और जिम्मेदारी दी, इसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे। हालांकि, उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे किसी राजनीतिक नाराजगी का जिक्र न करते हुए केवल अपने 'निजी कारणों' का हवाला दिया है। रवि भगत ने इस इस्तीफे की कॉपियां पार्टी के राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर के शीर्ष नेतृत्व को भी भेज दी हैं।
साल 2025 का 'कारण बताओ नोटिस' फिर आया सुर्खियों में
अनुशासनात्मक पृष्ठभूमि: रवि भगत का इस्तीफा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनका नाम पहले भी संगठनात्मक अनुशासन से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। साल 2025 में भाजपा ने उन्हें सोशल मीडिया पर संगठन की नीतियों के खिलाफ बयानबाजी करने और पार्टी विरोधी रुख अपनाने के आरोप में एक सख्त 'कारण बताओ नोटिस' (शो-कॉज नोटिस) जारी किया था। उस दौरान पार्टी ने उनसे तय समय में जवाब मांगा था और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। अब उनके इस अचानक इस्तीफे के बाद वह पुराना घटनाक्रम एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में तैरने लगा है।

DMF फंड में पारदर्शिता को लेकर लगातार मुखर थे रवि भगत
इस्तीफे की एक बड़ी इनसाइड स्टोरी यह भी मानी जा रही है कि रवि भगत पिछले काफी समय से जिला खनिज न्यास (DMF) फंड के उपयोग, आबंटन और खर्चों को लेकर अपनी ही सरकार और प्रशासन पर लगातार सवाल उठा रहे थे।उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से डीएमएफ फंड के पैसों में भारी वित्तीय अनियमितताओं का अंदेशा जताते हुए इसमें पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग की थी। उनके इन बयानों को लेकर पार्टी के भीतर भी काफी समय से खींचतान चल रही थी, जो अब इस इस्तीफे के रूप में सामने आई है।
आधिकारिक बयान और प्रतिक्रिया का इंतजार
इस बड़े राजनैतिक घटनाक्रम के बाद भाजपा संगठन की ओर से अब तक कोई भी विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी ओर, रवि भगत से भी इस विषय पर विस्तृत बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी तरफ से भी अभी तक कोई नई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस इस्तीफे को लेकर हलचल और ज्यादा तेज होने वाली है।

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