PoK में हिंसा पर पाकिस्तान की बढ़ीं मुश्किलें, UN ने मांगा स्पष्टीकरण
जिनेवा। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में व्याप्त अशांति और हिंसा की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है। उन्होंने इस हिंसा में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों की जान जाने की घटनाओं की त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।
नागरिक अधिकारों और संगठन पर प्रतिबंध का संकट
क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही 'संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिसमें व्यापारी, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस कदम को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा करने के बुनियादी अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया है। प्रशासन द्वारा संगठन के नेताओं की गिरफ्तारी और उनके प्रति अपनाए गए कड़े रुख को लेकर मानवाधिकार आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई है। आयोग का मानना है कि नेताओं को कानूनी सहायता और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना अनिवार्य है।
इंटरनेट बंदी और सूचना का अधिकार
तनावपूर्ण माहौल में क्षेत्र में लगाई गई इंटरनेट सेवाओं पर रोक को भी मानवाधिकार कार्यालय ने चिंताजनक बताया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने से नागरिकों के सूचना प्राप्त करने और साझा करने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों की समस्याओं को और गंभीर बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की अपील की है, ताकि लोगों का संपर्क बना रहे और सूचना का प्रवाह सुचारू हो सके।
राजनीतिक संवाद और शांति का मार्ग
संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में व्याप्त अशांति का समाधान बल प्रयोग में नहीं, बल्कि समावेशी और व्यापक राजनीतिक संवाद में निहित है। उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने स्थानीय निवासियों की शिकायतों को सुनने और उनके समाधान के लिए सार्थक चर्चा शुरू करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि स्थायी शांति और स्थिरता केवल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनहितकारी संवाद के माध्यम से ही संभव है। यह अपील ऐसे समय में आई है जब आगामी चुनावों के मद्देनजर क्षेत्र में भारी तनाव बना हुआ है।

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