अफसरों को मिली क्लीनचिट
प्रशासनिक गलियारा सीताराम ठाकुर
अफसरों को मिली क्लीनचिट
राजधानी भोपाल के कोलार इलाके में स्थिति गुराडी घाट गांव में देशभर के करीब 50 आईएएस, आईपीएस अफसरों द्वारा जमीन खरीदी का मामला जोर-शोर से उठा था। इस इलाके में मप्र के जिन अफसरों ने जमीन खरीदी, उनमें जयति सिंह, अंशुल गुप्ता, मयंक अग्रवाल, रजनी सिंह, प्रवीण सिंह अडायच, साकेत मालवीय आदि आईएएस शामिल थे। साथ ही तेलंगाना, हरियाणा आदि राज्यों के अफसरों ने भी एक ही दिन में खेती की बेशकीमती जमीन खरीदी। इस मामले को पीएमओ ने गंभीरता से लेते हुए मप्र सरकार से इन अफसरों के बारे में रिपोर्ट तलब की थी। सूत्र बताते है कि मप्र सरकार ने जमीन खरीदने वाले सभी अफसरों को यह कहते हुए क्लीनचिट दे दी कि यह नए अफसर हैं और इन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि उक्त जमीन विवादित है और अपनी रिपोर्ट पीएमओ को भेज दी। मामला कुछ भी हो, लेकिन प्रदेश के अधिकांश आईएएस जिलों में कलेक्टरी संभाल रहे हैं, उन्हें बचाने के लिए मप्र सरकार ने यह कदम उठाया है, जिससे अफसरों को राहत मिल गई है।
मंत्री के घर बेटा-पत्नी में विवाद
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से आने वाले एक मंत्री खुद को स्वच्छ छवि और ईमानदार छवि का बताने से पीछे नहीं हटते हैं, लेकिन उनके घर में ही काफी विवाद चल रहा है। सूत्र बताते है कि मंत्री महाशय की दो-दो पत्नियां हैं, पहली पत्नी से दो पुत्र हैं और दूसरी पत्नी को भोपाल में उन्होंने गिफ्ट के तौर पर आलीशान कोठी बनाकर दी है। लेकिन ट्रांसफर सीजन के दौरान पहली पत्नी के बडेÞ बेटे और दूसरी पत्नी में लेनदेन को लेकर विवाद हो गया। ट्रांसफर के नाम पर दोनों की अलग-अलग डिमांड होने से मंत्री स्टाफ में पदस्थ अमले ने भी हाथ खडेÞ कर दिए, बल्कि ओएसडी एक रिटायर्ड अधिकारी की सेवाएं भी मंत्री द्वारा ली जा रही हैं। इस विवाद के चलते दोनों ने ट्रांसफरों से दूरी बना ली। विवाद के बाद मंत्री ने ट्रांसफर की लिस्ट ओके की, लेकिन मंत्री की पत्नी और बेटे का विवाद अब मंत्रालय और विंध्याचल भवन तक सुनाई देने लगा है, जिसकी चर्चा चटकारे लेकर अधिकारी करते नजर आ रहे हैं।
संवैधानिक पद मिलते ही करोड़ों की संपत्ति
उज्जैन और जबलपुर में पदस्थ रहे एक अधिकारी को सरकार ने एक विभाग का प्रमुख सचिव बनाया था। करीब डेढ़ साल पहले साहब रिटायर भी हो गए और उसके बाद सरकार ने उन्हें भ्रष्टाचार की जांच से जुडेÞ एक संगठन का मुखिया बना दिया। अब रिटायर प्रमुख सचिव को जैसे ही यह संवैधानिक पद मिला, उन्होंने उसका लाभ उठाने में देर नहीं की और भोपाल में उन्होंने करोड़ों की संपत्ति खरीद डाली। यह संपत्ति भी संवैधानिक पद पर बैठे साहब ने एक रिटायर अफसर से खरीदी। जिसकी कीमत 8 से 10 करोड़ बताई जाती है। सूत्र तो यह भी बताते है कि यह संवैधानिक पद भी उन्हें ऐसे ही नहीं मिला, बल्कि इस मामले का विरोध नेता प्रतिपक्ष ने भी किया था, लेकिन बहुमत के आधार पर उन्हें संवैधानिक पद दे दिया गया और देने वाले को भी साहब ने कुछ साल पहले ओवलाइज किया था, जिसका लाभ उन्हें बाद में मिला?, इसकी काफी चर्चा मंत्रालय के गलियारों में सुनाई देने लगी है।
शादी का कार्ड देने होना पड़ा लज्जित
हाल ही में एक डीआईजी की बेटी की शादी थी, वह अपनी बेटी की शादी का कार्ड बांटने मंत्रालय भी पहुंच गए। उन्होंने मीडिया जगत से भी चुनिंदा लोगों को भी शादी का निमंत्रण दिया, लेकिन जैसे ही वह मंत्रालय में एक सचिव स्तर की महिला अधिकारी को निमंत्रण देने पहुंचे और पर्ची मेडम को भेजी, मेडम ने चपरासी को डांटते हुए कहा-कौन मिलना चाहता है, तो चपरासी ने कहा- मेडम एक डीआईजी साहब हैं, मेडम ने कहा-मैं उन्हें नहीं पहचानती?, तुम ही शादी का कार्ड ले लो, मेडम के इस व्यवहार से डीआईजी साहब काफी अपमानित हुए। जबकि एक समय वे डीजीपी के खास हुआ करते थे, लेकिन प्रमोशन से आईपीएस बने, इस कारण सीधी भर्ती की महिला अफसर ने उनकी बेटी की शादी का कार्ड लेने से इंकार कर दिया। अब इस बात की खुसर-फुसर कर्मचारियों में होने लगी है कि एक ही संवर्ग के जूनियर अधिकारी के साथ मेडम द्वारा किया गया व्यवहार ठीक नहीं हैं और इस मामले की चर्चा वे चटकारे लेकर करते नजर आए।
आखिर किसे बचाने दिखाई तत्परता
हाल ही में सामने आए एक चर्चित हनीट्रैप प्रकरण को लेकर अब नए-नए कयास लगाए जा रहे हैं। मामला जितना सुर्खियों में रहा, उससे हीं ज्यादा चर्चा अब पुलिस की असाधारण सक्रियता को लेकर हो रही है। आमतौर पर ऐसे मामलों में जांच की रफ्तार सुस्त रहने और कार्रवाई लंबे समय लगने की शिकायतें सुनने को मिलती हैं, लेकिन इस मामले में तस्वीर बिल्कुल अलग दिखाई दी। सूत्र बताते हैं कि शिकायत सामने आते ही पुलिस और क्राइम ब्रांच ने जिस तेजी से मोर्चा संभाला, उसने कई लोगों को हैरान कर दिया। आरोपियों की पहचान, धरपकड़ और जेल भेजने तक की पूरी प्रक्रिया इतनी फुर्ती से पूरी हुई कि विभाग के भीतर भी इसकी चर्चा होने लगी। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस मामले में ऐसी कौन सी खास बात थी, जिसने सिस्टम को इतनी तेजी से काम करने पर मजबूर कर दिया?पुलिस महकमे में इसकी तरह-तरह चर्चाएं होने लगी। कुछ लोगों का कहना है कि इस मामले की परतें यदि ज्यादा खुलतीं तो कई प्रभावशाली नाम सामने आ सकते थे, इसलिए आनन-फानन में मामले को ठंडा करने सक्रियता दिखाई गई और अब मामला बस्ते में बंद भी कर दिया गया?

राशिफल 05 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
हर्ष फायरिंग की कीमत: जश्न की गोली ने ली जान, BJP विधायक को मिली सजा
गुजरात दौरे पर पीएम मोदी का बड़ा दावा, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की बढ़ी ताकत
शादी का झांसा देकर शोषण का आरोप, शिक्षिका की मौत मामले में वकील पर केस
बिहार में न्याय व्यवस्था होगी और तेज, सम्राट चौधरी सरकार का अहम फैसला
महिला के पेट पर लात मारने का आरोप, 6 माह की गर्भावस्था में जुड़वा बच्चों की मौत