मंत्री ने महिला टीचर को बनाया वसूली एजेंट
प्रशासनिक-गलियारा
सीताराम ठाकुर, भोपाल
मंत्री ने महिला टीचर को बनाया वसूली एजेंट
प्रदेश में महिलाओं से खास प्रेम रखने वाले सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने एक महिला टीचर को नियमों के विपरीत फ्लाइंग स्कॉर्ट का प्रभारी बनाया है। वैसे यह फ्लाइंग स्कॉर्ट जिले और ब्लॉक में निरीक्षण करने जाती और वहां के अधिकारियों से मंत्री के लिए कलेक्शन का काम करती है। वैसे मंत्री प्राइमरी स्कूल की इस टीचर पर काफी मेहरबान हैं, इसलिए पहले उसकी पोस्टिंग सांख्यिकी अधिकारी बनाकर अपने जिले में करवा दी और बाद में पीएससी से नियुक्ति होने वाले मंडल संयोजक के पद पर प्रभारी अधिकारी बनाकर इंदौर में एक बड़ा सरकारी बंगला भी आवंटित करवा दिया। अब फ्लाइंग स्कॉर्ट प्रभारी वसूली कर मंत्री की जेब गरम कर रही हैं। हालांकि मंत्री महिलाओं को लेकर काफी समय से विवाद में घिरे हुए हैं, फिर भी हर बार सरकार उन्हें बचा लेती है, जिसकी चर्चा अब मंत्रालय में होने लगी है।
गुमनाम खत से एमएलए निशाने पर
राजनीति में सफलता और विवाद का पुराना रिश्ता है। शाजापुर जिले के एक एमएलए की राजनीति इन दिनों एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ी दिख रही है, जहां गुमनाम खत ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। इस बार निशाने पर हैं भाजपा के दूसरी बार के विधायक । यह खत ऐसे वक्त सामने आया है, जब प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। गुमनाम खत में विधायक की कार्यशैली, व्यवहार और राजनीतिक छवि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, खत पर किसी का नाम या पहचान दर्ज नहीं है। यही वजह है कि इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। वैसे विधायक बनने से पहले ये महाशय स्टाम्प बेचने का व्यवसाय करते थे, लेकिन भाजपा की राजनीति में आने के बाद उनके जलवे काफी बढ़ गए हैं। उन्हें लोग भू-माफिया की पदवी से नवाज रहे है और कहा यह जाता है कि हर अवैध कॉलोनी में एमएलए का हिस्सा फिक्स रहता है?
भेदिया अफसर की तलाश जारी
कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में बड़े साहब द्वारा कलेक्टरों को दी गई नसीहत को मीडिया तक पहुंचाने में भूमिका निभाने वाले अफसर की वैसे तो सरकार ने पहचान कर ली है, लेकिन फिर भी इस भेदिये की श्रेणी में तीन अफसरों के नामों की चर्चा मंत्रालय में जमकर हो रही है। इनमें दो अफसर एसीएस स्तर के हैं, तो एक अफसर सचिव स्तर का बताया जा रहा है। जिस भेदिये का नाम सामने आ रहा हैं, वह सीएम से नजदीकी होने के कारण सरकार उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई करने में भी हिचकिचा रही है, लेकिन वह अफसर अब बडेÞ साहब की नजर में जरूर चढ़ गया है। जब भी मौका मिलेगा, तब उसके ‘पर’ कतर दिए जाएंगे, ऐसा लगता संभव नहीं है। चाहे जो भी हो, लेकिन यह मामला सोशल मीडिया से लेकर अखबार में सुर्खियां जरूर बटोर चुका हैं, जिसकी चर्चा मंत्रालय में सुन सकते हैं।
बदनाम ठेकेदार से केंद्रीय मंत्री भी खफा
देश में इस समय केंद्र और राज्य सरकार का सबसे अधिक फोकस सड़कों के निर्माण पर है। इसके पीछे हाथ केंद्रीय मंत्री का भी है। मप्र में भी एनएचएआई के कई प्रोजेक्ट चल रहे हैं। जिसकी समीक्षा केंद्रीय मंत्री निरंतर करते रहते हैं। पिछले दिनों एनएचएआई की समीक्षा के लिए दिल्ली में बैठक बुलाई गई। समीक्षा में मप्र की सड़क योजनाओं के निर्माण की प्रगति देखकर केंद्रीय मंत्री खुश हुए और अफसरों की पीठ थपथपाई। लेकिन मुख्य सचिव की मौजूदगी में उस समय अफसरों के होश उड़ गए, जब केंद्रीय मंत्री ने उनसे पूछ लिया कि आपके यहां सारे काम एक ही व्यक्ति करता है। केंद्रीय मंत्री इशारा उस व्यक्ति की तरफ था, जो कंसल्टेंट और कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाता है। उक्त व्यक्ति निर्माण एजेंसियों पर इस कदर छाया हुआ है कि वे उसके मोह से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। वैसे उक्त ठेकेदार भी अफसरों को खुश करने से पीछे नहीं हटता, लेकिन केंद्रीय मंत्री की बात सुनकर अफसरों के होश उड़ गए।
पीएस ने ईएनसी से तोड़ा नाता
निर्माण विभाग से जुडेÞ एक विभाग के प्रमुख सचिव इन दिनों अपने ही विभाग के प्रमुख अभियंता (ईएनसी)से काफी खफा नजर आ रहे है। पीएस सीएम हों या सीएस के कामों के लिए ईएनसी की अपेक्षा ईएनसी के नीचे के अफसरों को निर्देश-आदेश देते हैं। वह किसी भी काम के लिए ईएनसी से बात तक नहीं करते हैं। पीएस की यह नाराजगी बीते कुछ समय से देखने को मिल रही है। खासकर ईएनसी के व्यवहार से अधिकारी खुश नहीं हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हर इंजीनियर को ईएनसी क्लीनचिट दे देते हैं। यह क्लीनचिट किस कारण दी गई, यह अलग बात है। लेकिन सरकार की जांच में जो अधिकारी दोषी पाए गए हैं, उन्हें भी ईएनसी द्वारा क्लीनचिट दिए जाने से पीएस खासे खफा हैं और उन्होंने ईएनसी से बात करना भी बंद कर दिया है। अब देखना यह है कि इनकी बोलती कब शुरू होती है?

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