क्या बीमारी की जानकारी के लिए एआई पर भरोसा करना सही है?
मेडिकल सलाह के लिए एआई पर निर्भरता पड़ सकती है भारी, विशेषज्ञों ने दी कड़ी चेतावनी
क्या आप भी शरीर में होने वाली समस्याओं के समाधान के लिए गूगल या एआई (AI) का सहारा लेते हैं? अपने लक्षणों के आधार पर बीमारी का खुद पता लगाने की कोशिश करते हैं? यदि हाँ, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। आज के डिजिटल युग में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करने का तरीका बदल गया है। पहले जहाँ लोग डॉक्टर के पास जाते थे, वहीं अब एआई चैटबॉट्स से यह पूछ रहे हैं कि दर्द का कारण क्या है, मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट का क्या अर्थ है या कौन सी दवा लेनी चाहिए। लेकिन क्या ये जवाब वास्तव में भरोसेमंद हैं?
आधे से ज्यादा जानकारी गलत: ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि एआई आधारित चैटबॉट लगभग 50% से अधिक समय गलत या भ्रामक मेडिकल जानकारी देते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई की अपार क्षमता के बावजूद, अक्सर पक्षपातपूर्ण ट्रेनिंग के कारण ये चैटबॉट गुमराह करने वाले जवाब दे सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई कई बार तथ्यों के बजाय उन जवाबों को प्राथमिकता देता है जो यूजर की मान्यताओं से मेल खाते हों, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक हो सकता है।
अध्ययन के चौंकाने वाले नतीजे: एक विशेष समीक्षा के दौरान पांच लोकप्रिय चैटबॉट्स से कैंसर, वैक्सीन, पोषण और स्टेम सेल जैसे संवेदनशील विषयों पर सवाल पूछे गए। ये ऐसे विषय हैं जहाँ गलत जानकारी का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। अध्ययन में पाया गया कि आधे से ज्यादा मामलों में एआई के जवाब 'समस्याग्रस्त' थे। ये जवाब यूजर्स को ऐसे उपचारों की ओर ले जा सकते हैं जो निष्प्रभावी हों या बिना विशेषज्ञ की सलाह के अपनाने पर शरीर को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हों।
प्रॉम्प्ट का असर और विशेषज्ञ की सलाह: शोधकर्ताओं ने पाया कि एआई को दिए जाने वाले 'प्रॉम्प्ट' (सवाल पूछने का तरीका) का जवाब की सटीकता पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। निष्कर्ष यह निकला कि एआई की प्रतिक्रियाएं सुनने में तो डॉक्टर जैसी लग सकती हैं, लेकिन उनमें तकनीकी गलतियां होने की संभावना बहुत अधिक होती है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि एआई से मिली गलत जानकारी सेहत पर बुरा असर डाल सकती है, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले असली डॉक्टर की सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

शिवसेना विवाद: उद्धव गुट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तैयार, बागी सांसदों और लोकसभा सचिवालय को नोटिस
क्वाड बैठक में जयशंकर का बड़ा बयान, स्वतंत्र और समावेशी हिंद-प्रशांत पर दिया जोर
सावधान! मध्य प्रदेश में 'चड्डी-बनियान गैंग' की दस्तक, पुलिस ने जारी की चेतावनी
पेपर लीक को लेकर राहुल गांधी का बड़ा आरोप, बोले- 10 साल में 152 मामले, लेकिन कार्रवाई नहीं
भोजशाला मामले में नया मोड़, नमाज स्थल को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद