आईएएस दंपति ने किया बड़ा निवेश
आईएएस दंपति ने किया बड़ा निवेश
सीताराम ठाकुर
मप्र आईएएस कैडर में सचिव स्तर के आईएएस दंपति ने करीब 20 करोड़ की संपत्ति खरीदने में निवेश किया है। आईएएस पति ने अपने भाई और साले के नाम पर होंशगाबाद रोड पर यह संपत्ति खरीदी है। वैसे आईएएस की पत् नी भी काफी विवादों में रहीं हैं और पति भी। लेकिन सरकार ने आईएएस की पोस्टिंग पूर्व में और पत् नी की पोस्टिंग मध्य में कर करीब 315 किमी की दूरी बना दी है। हालांकि पीएम मोदी की अपील के बाद भी आईएएस दंपति विदेश घूमने से नहीं चूके। संपत्ति खरीदने के बाद दोनों लंबी छ्ट्टी लेकर एंग्जाय करने में जुटे हुए हैं। एक समय आईएएस पूर्व मुख्यमंत्री के नजदीकी रहे हैं और बाद में उनसे कलेक्टर वापस लेकर मंत्रालय में पदस्थ कर दिया गया, फिर कृषि से जुडेÞ कामों की कमान सौंप दी गई, लेकिन यहां भी उनकी पटरी सचिवों से नहीं बैठी। आखिरकार सरकार ने उन्हें पूर्व क्षेत्र में पदस्थ कर खुला खेल करने की छूट दे दी है, जिसके चर्चे मंत्रालय तक सुनाई देने लगे हैं?
सोम’ को क्लीनचिट देने का दवाब
‘सोम रस’को लेकर विवादों में आए एक आईएएस की पोस्टिंग सरकार ने लूप लाइन में कर दी, उन्हें यह पोस्टिंग अब रास नहीं आ रही, तो उन्होंने केंद्र सरकार में जाने के लिए आवेदन कर दिया, लेकिन अभी भी ‘सोम’ का मामला विवाद में बना हुआ है। हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकार ने जांच के लिए जिस कमेटी का गठन किया है, उसमें इंदौर और भोपाल के कुछ आबकारी अधिकारियों को भी जवाबदारी दी गई है। इंदौरी अफसर पर दवाब है कि वे जल्द इस मामले में जांच कर ‘सोम’ को क्लीनचिट दें!, सोम को लेकर नीचे के अधिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च स्तर पर भी ‘खेल’ चलने लगा है। इस मामले को ठंडा करने में कमिश्नर पर भी तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं। वैसे इस दल-दल में जो भी अफसर उतरा उसने कमाई अच्छी कर ली, लेकिन बदनामी काफी हुई। अब जबलपुर कलेक्टर रहे एक अफसर का भी नाम दवाब बनाने में सामने आया है, अफसर भोपाल में बैठकर मामले को रफा-दफा कराने की जुगाड़ में भिडेÞ हुए है, लेकिन पीएस हाथ धरने को तैयार नहीं है?
कम नहीं हुआ महिला अफसरों का विवाद
शिक्षा से जुडेÞ एक विभाग में पदस्थ रहीं दो महिला आईएएस का विवाद फिर चर्चा में आ गया है। एक समय दोनों ही महिला अधिकारी संचालक और अपर संचालक की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। विवाद की वजह ‘कमीशन’बना। बड़ी महिला अधिकारी ने ‘छोटी’अधिकारी से कहा-इस खेल का ‘कमीशन’उन्हें भी चाहिए, लेकिन कमीशन कम मिल रहा था, जिससे छोटी महिला अधिकारी तिलमिला गर्इं और उन्होंने अपना ट्रांसफर शिक्षा से जुडेÞ विभाग से मंत्रालय करवा लिया, लेकिन मंत्रालय में भी उन्हें ‘होम’ की जिम्मेदारी दे दी गई, उन्हें यह पता नहीं था कि ‘होम’ में भी उक्त बड़ी महिला आईएएस उनका पीछा नहीं छोडेंÞगी?, सरकार ने बड़ी महिला आईएएस को भी वहां पदस्थ कर दिया। अब दोनों में फिर विवाद शुरू हो गया है। छोटी महिला अधिकारी अब होम से बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगी हैं। वैसे बड़ी महिला आईएएस जब चंबल आदि में कलेक्टर थीं, तब भी विवादों में रहीं थीं? मामला अब सरकार के ‘नाक’ के नीचे हैं। जिसकी चर्चा मंत्रालय में सुनाई देने लगी है।
बिना जीएडी अनुमति बना दिया ओएसडी
एक प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी इस समय अपने ही अधीनस्थ पदस्थ एक महिला आईएएस से विवादों में घिरे हुए हैं, उसके पहले उन्होंने एक महिला अधिकारी को अपने अधीन बिना जीएडी अनुमति के ओएसडी बना दिया। वैसे उक्त महिला अधिकारी एक आयोग में सचिव के पद पर पदस्थ हैं और मंत्रालय में उनकी पोस्टिंग करने के पीछे पीएस की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। अपर संचालक के पद पर पदस्थ उक्त महिला अधिकारी को ओवलाइज करने के लिए अफसर ने जीएडी से भी अनुमति लेने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने महिला अधिकारी को मंत्रालय में एक कक्ष उपलब्ध कराने के लिए भी काफी हाथ-पैर मारे, लेकिन जीएडी के अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी। अब साहब इस बात से परेशान है कि उनके अधीनस्थ पदस्थ महिला आईएएस को कैसे हटाया जाए। वैसे इसके लिए वह पांचवी और चौथी मंजिल पर गुहार लगा चुके हैं, लेकिन बडेÞ अधिकारी भी उनकी सुनने की तैयार नहीं है। अब विभाग में पदस्थ अधिकारी पीएस की पैरवी करने में जुट गए है?
मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है?
फिल्म लावारिस का यह गीत तो आपने सुना ही होगा, ‘मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है’। कुछ इसी तर्ज पर पिछले दिनों लोगों ने प्रदेश के एक बिल्डर से मौन सवाल पूछ लिया कि हमारे अंगने में आपका क्या काम है?, दरअसल कुछ दिन पहले सरकार के मुखिया ने अपने जन्मदिन पर ‘कुसुस सी’योजना का अलॉटमेंट किया। उक्त कार्यक्रम में वे लोग तो पहुंचे ही थे, जिन्हें यह योजना अलॉट की गई थी। साथ ही कई अन्य लोग भी पहुंचे थे, जिनका प्रत्यक्ष तौर पर इस योजना से कोई लेना-देना नहीं था। इन्हीं में से एक थे, राजधानी के बडेÞ बिल्डर। इन्होंने सड़क से लेकर बडेÞ-बडेÞ निर्माण कार्यों में हाथ अजमाया है और जमकर कमाई की है। लेकिन जबसे सरकार बदली है, तबसे ये हाशिए पर है। लेकिन उक्त कार्यक्रम में खुद सरकार के मुखिया ने सबके सामने उनका हालचाल पूछकर उनका कद और बढ़ा कर दिया। हालांकि जिस तरह उक्त बिल्डर कुसुम-सी योजना में रुचि दिखा रहे थे, उससे लोग यह कहने को मजबूर हो गए कि देखो न अब इस काम में भी बिल्डर लोग घुसने लगे

राज्य के 7 जिलों में लोगों की आमदनी बढ़ाने के लिए एकीकृत आजीविका कार्यक्रम
राज्य वित्त आयोग 6 जून को करेगा नर्मदापुरम का दौरा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिलीं पर्वतारोही अंजना यादव
पर्यावरण दिवस पर मार्कफेड में वृक्षारोपण
‘खेत बचाओ अभियान‘ के तहत एनआईबीएसएम द्वारा हरी खाद तकनीक का सजीव प्रदर्शन
ऊर्जा मंत्री तोमर ने विषम परिस्थितियों में बिजली कार्मिकों द्वारा व्यवधानों के त्वरित निराकरण और उपभोक्ताओं के धैर्य की सराहना की