नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के अंतर्गत आने वाली एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने एक सराहनीय कार्य करते हुए दिल्ली और हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों से गायब हुए चार बच्चों और एक दिव्यांग महिला को सुरक्षित ढूंढ निकाला है। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर सभी को उनके परिवारों को सौंप दिया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि एक मानसिक रूप से कमजोर महिला और सात वर्षीय मासूम को पुलिस ने महज 24 घंटे के अंदर ही खोज निकाला।

क्राइम ब्रांच के विशेष आयुक्त एचजीएस धालीवाल के अनुसार, यह सफलता एसीपी सुरेश कुमार के निर्देशन में इंस्पेक्टर मुकेश कुमार और मनोज दहिया की टीम को मिली। पुलिस टीम ने आधुनिक सर्विलांस तकनीक और अपने गुप्तचरों (मुखबिर तंत्र) से मिली सटीक जानकारी के दम पर इन सभी को बरामद किया।

मामला 1: नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से दो सगे भाई सुरक्षित मिले

पहले मामले में, हजरत निजामुद्दीन क्षेत्र से 10 जून को दो सगे भाई (उम्र 10 साल और 6 महीने) घर के बाहर खेलते समय रास्ता भटक गए थे। भटकते हुए दोनों मासूम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच गए। स्टेशन पर इन्हें अकेला देखकर जीआरपी/पुलिस ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए पहाड़गंज के 'साथी चिल्ड्रेन होम' में सुरक्षित रखवा दिया। क्राइम ब्रांच की टीम ने गहन जांच के बाद बच्चों का पता लगाया और उन्हें उनके माता-पिता के सुपुर्द किया।

मामला 2: 24 घंटे के भीतर ढूंढ निकाली गई दिमागी रूप से अस्वस्थ महिला

दूसरे वाकये में, स्वरूप नगर की रहने वाली एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला 11 जून को बिना बताए अपनी बहन के घर के लिए निकली थी, लेकिन रास्ता भूल गई। एएसआई अजय कुमार झा ने तकनीकी सर्विलांस का उपयोग करते हुए महिला की लोकेशन ट्रैक की। महिला पुलिसकर्मियों की टीम ने भाई को साथ लेकर मंदिर मार्ग बस स्टैंड से महिला को महज 24 घंटे में सकुशल ढूंढ लिया। वीडियो कॉल के माध्यम से थाने से वेरिफिकेशन कराकर महिला को घर भेजा गया।

मामला 3: आगे पढ़ने की चाहत में घर छोड़ हरियाणा भागा किशोर बरामद

तीसरा मामला एक 15 साल के किशोर का है, जो 13 जून को लापता हो गया था। इस बच्चे के पिता का 10 साल पहले निधन हो चुका था और वह अपने ताऊ के साथ रहता था। 10वीं पास करने के बाद वह आगे उच्च शिक्षा पाना चाहता था, लेकिन ताऊ पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ थे। इसी बात से नाराज होकर वह हरियाणा के सोनीपत चला गया था। बवाना थाने के इंस्पेक्टर मनोज दहिया की टीम ने उसे सोनीपत से खोज निकाला और उसकी काउंसलिंग कर उसे परिवार के पास वापस भेजा।

मामला 4: बिहार से इलाज कराने आया 7 साल का मासूम रेस्क्यू

चौथे मामले में, बिहार से माता-पिता अपने 7 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्चे को इलाज के लिए दिल्ली लाए थे। 20 जून को वह घर के बाहर से अचानक गायब हो गया। इस मामले में एएसआई अजय कुमार झा को एक व्हाट्सएप ग्रुप से इनपुट मिला। उन्होंने तुरंत 'जिपनेट' (ZIPNET) पोर्टल पर सर्च किया, जहाँ एक बच्चे का हुलिया मैच हो गया। बच्चे की तस्वीर जब पिता को व्हाट्सएप पर भेजी गई, तो उन्होंने तुरंत पहचान लिया। वह बच्चा सीडब्ल्यूसी (लाजपत नगर) में सुरक्षित था, जहाँ से उसे रेस्क्यू कर परिजनों को सौंप दिया गया।