सीताराम ठाकुर 

‘हेनरी’ की बढ़ सकती है मुश्किलें 
 एक समय आबकारी मंत्री के खासमखास में शुमार रहे राजेश हेनरी की अब मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामले में तत्काल जांच कर निर्णय लेने के निर्देश मप्र सरकार को दिए हैं। वैसे सरकार पहले ही ‘हेनरी’ को आबकारी विभाग के उप संचालक पद से अपर संचालक के पद पर प्रमोट कर चुकी है। भोपाल में पदस्थापना के दौरान काफी विवादों में रहे ‘हेनरी’ के पास मंत्री के ओएसडी का भी चार्ज था और इस आड़ में उन्होंने करोड़ों का खेल भोपाल सहित प्रदेशभर के पेंडिंग मामलों के निराकरण करवाने का किया है। मंत्री की धौस के चलते उन्हें विभाग के अफसरों ने प्रमोशन भी दे दिया, लेकिन अब न्यायालय का डंडा सख्त होता है। यदि समय रहते सरकार ने उनके फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले की जांच कर निर्णय नहीं लिया तो सरकार ही नहीं, बल्कि हेनरी की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वैसे हेनरी पर सरकार के कुछ आला अफसरों का हाथ है, जिसके चलते उन्हें बचाने का प्रयास भी किया जाएगा। अब देखना हयह है कि राज्य स्तरीय छानबीन समिति इस मामले में क्या निर्णय लेती है? 

बडे अफसरों पर नहीं गिरी गाज 

बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद सरकार ने आनन-फानन में क्रूज चालक, हेल्पर का बर्खास्त और इंजीनियर को सस्पेंड करते हुए मैनेजर को वहां से हटा दिया है, लेकिन एक 10 अप्रैल का भी वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें जिला पंचायत जबलपुर की बैठक क्रूज पर होती दिखाई दे रही है। इस वीडियो में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मीटिंग के दौरान भी  किसी ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी, जबकि यह बुनियादी सुरक्षा का नियम है। मीटिंग के अलावा क्रूज पर घूमना, फोटो-वीडियो शूट और ड्रोन रिकॉर्डिंग भी हुई थी। जब अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने खुद सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया, तो आम पर्यटकों से नियमों के पालन की कैसे उम्मीद की जा सकती है? वैसे यह मामला अब राजनीति रूप में लेता जा रहा है। रविवार को कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में पर्यटन मंत्री का बंगला घेरा। आने वाले दिनों में शायद कांग्रेस इससे भी बड़ा आंदोलन करने का मूड बना रही है। वजह कुछ भी हो, लेकिन क्रूज हादसे में 13 लोगों की मौत ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल जरूर खडेÞ कर दिए है, जिसकी चर्चा मंत्रालय में भी सुनाई देने लगी है। 

देर रात तक जागती है सरकार? 

राज्य सरकार ने शनिवार देर रात करीब सवा बजे 62 आईपीएस अधिकारियों के ट्रांसफर किए हैं। आईएएस हों या आईपीएस हर बार सरकार देर रात में ही अफसरों के ट्रांसफर करती है। इसके पीछे के राज को जानने के लिए अधिकारी भी परेशान हैं। आईपीएस के इस फेरबदल में 23 जिलों के एसपी, एडीजी, आईजी और डीआईजी बदले गए हैं। सिंगरौली में हाल ही में हुए बैंक डकैती के बाद एसपी मनीष खत्री को हटा दिया गया है। उन्हें एआईजी पीएचक्यू बनाया गया है। वहीं सिवनी जिले में सामने आए हवाला कांड के चलते काफी समय बाद एसपी सुनील मेहता को भी हटाया गया है, उन्हें डीसीपी इंदौर बनाया है और बुरहानपुर के एसपी देवेंद्र पाटीदार को झाबुआ भेज दिया गया है, लेकिन उनके स्थान पर अभी किसी अधिकारी को एसपी नहीं बनाया है। इसी तरह से सागर आईजी हिमानी खन्ना के रिटायर होने के बाद भी सागर आईजी के पद पर किसी सीनियर आईपीएस की पोस्टिंग नहीं की गई है। इसके चलते माना जा रहा है कि जल्दी ही आईपीएस अफसरों के तबादले की एक और सूची जारी हो सकती है। हालांकि अफसर तर्क दे रहे हैं कि सरकार को जल्द ट्रांसफर सूची जारी करनी चाहिए। 

जमीन पर भी आईटी का खेल 

भविष्य में आईटी और एआई का जमाना आने वाला है। इसको देखते हुए मप्र के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने अभी से रिटायरमेंट की प्लानिंग तैयार कर ली है। उक्त आईएएस अधिकारी ने एक आईटी कंपनी खोल ली है। वैसे तो साहब ने कंपनी अपने भांजे के नाम पर शुरू की है, लेकिन बैकग्राउंड में उसके सर्वेसर्वा साहब ही हैं। साहब अभी सरकारी नौकरी में हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि रिटायरमेंट से पहले वे मप्र की सरकारी व्यवस्था में कंपनी को इस करद व्यवस्थित कर दिया जाए कि रिटायरमेंट के बाद घर बैठकर माल कमाया जा सके। इसलिए अभी तक वे जिस विभाग में पदस्थ रहे हैं, उस विभाग के सारे आईटी के काम उसी कंपनी को मिल जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में साहब जमीनों से जुडेÞ एक विभाग में पदस्थ हैं। यहां भी उन्होंने अपनी कंपनी को काम में लगा दिया है। साहब की आईटी कंपनी अब जमीनों के मामले में भी जमकर खेला कर रही है। बताया जाता है कि साहब किसी भी विभाग में पदस्थ रहें, लेकिन वे अपने साथी अफसरों से मेल-मुलाकात बढ़ाकर उक्त विभाग में अपनी आईटी कंपनी के लिए काम जरूर दिलवा देते हैं, जिसकी चर्चा मंत्रालय में भी सुनाई देने लगी है। 

रेरा में होगी अब बाहरी व्यक्ति की आमद 

मध्यप्रदेश में रेरा अध्यक्ष की कुर्सी काफी लंबे समय से खाली पड़ी हुई हैं। हालांकि उक्त कुर्सी को हथियाने के लिए कई रिटायर्ड आईएएस ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, लेकिन सरकार मामले को टालती जा रही है। बताया जाता है कि सरकार रेरा के पुराने विवादों को देखते हुए अध्यक्ष किसी प्रायवेट व्यक्ति को बना सकती है या फिर रिटायर्ड जज को कुर्सी पर बैठा सकती हैं। वैसे उत्तराखंड में रेरा का अध्यक्ष वकील को बना रखा है, वहीं छत्तीसगढ़ में एक आईपीएस को बना दिया गया है, जबकि पश्चित बंगाल में भी रेरा का अध्यक्ष एक प्रायवेट व्यक्ति को बनाया गया है। यह रणनीति मप्र में भी लागू की गई तो फिर चाहे बिल्डिर हो या कॉलोनाइजर वह भी अध्यक्ष बन सकता है? ऐसे में अगले रेरा अध्यक्ष के नाम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कोई संघ तो कोई भाजपा संगठन के माध्यम से लॉबिंग करने में जुटा है। हालांकि इस बार दावेदारों की पूरी तरह पड़ताल करने के बाद रेरा अध्यक्ष का फैसला सरकार करेगी, लेकिन इसके लिए सिर्फ इंतजार करना होगा?