बर्लिन/नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज से तीन दिवसीय जर्मनी दौरे पर हैं, जो सामरिक और औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले सात वर्षों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की यह पहली जर्मनी यात्रा है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और भविष्य की तकनीकों पर साझा काम करना है।

रणनीतिक वार्ता और महत्वपूर्ण समझौते

राजनाथ सिंह अपने जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियस के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बैठक के दौरान दो प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है:

  1. रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप: रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देना।

  2. शांतिरक्षा अभियान व्यवस्था: संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशनों के प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाना।

भविष्य की तकनीक और 'मेक इन इंडिया'

वार्ता के एजेंडे में पारंपरिक सैन्य सहयोग के अलावा साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्र शामिल हैं। राजनाथ सिंह जर्मनी के रक्षा उद्योग के दिग्गजों से भी मुलाकात करेंगे। उनका मुख्य जोर भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत जर्मन कंपनियों को भारत में निवेश, तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उद्यम (Joint Ventures) के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

दौरे की अहमियत

भारत और जर्मनी के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक स्थिरता पर आधारित हैं। 2019 के बाद यह पहली बार है जब भारत की ओर से इतनी उच्च स्तरीय रक्षा यात्रा हो रही है, जो बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यूरोप के साथ भारत के गहरे होते सैन्य रिश्तों को दर्शाती है।