प्रदूषण मंडल में फिर विवाद...
प्रदूषण मंडल में फिर विवाद
राज्य सरकार ने मप्र प्रदूषण निवारण मंडल की जिम्मेदारी एक एसीएस स्तर के अधिकारी को सौंपी है। इसके पहले जब उक्त अधिकारी प्रमुख सचिव थे, तब भी वे प्रदूषण मंडल की कमान संभाल रहे थे, लेकिन तत्कालीन समय में चेयरमैन और सदस्य सचिव के बीच विवाद होने की वजह से सदस्य सचिव इतने पावरफुल निकले की उन्होंने प्रमुख सचिव (चेयरमैन)को हटवा दिया। अब सदस्य सचिव प्रदूषण मंडल में संविदा के आधार पर नियुक्त किए गए हैं और उनके कार्यकाल में अब तीन माह ही बचा है। ऐसे में चेयरमैन बने एसीएस ने अभी से उनके रास्ते में रोड़ा अटकाने प्रारंभ कर दिए हैं। सूत्र बताते है कि एसीएस सदस्य सचिव से इतने खफा हैं कि ‘उन्हें फूटी आंख’ भी पसंद नहीं करते? सालों पहले शुरू हुआ इनके बीच का विवाद अभी तक ठंडा नहीं हुआ है और एसीएस चेयरमैन नहीं चाहते हैं कि सदस्य सचिव पुन: संविदा नियुक्ति पर वापस आएं। इसके लिए एसीएस ने सरकार में भी विरोधी स्वर तेज कर दिए हैं। अब देखना यह है कि प्रदूषण मंडल में ताकतवर कौन निकलता है?
डायरेक्टर के सामने रोने लगीं महिला अफसर
कृषि विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर पदस्थ एक महिला अफसर को अपर संचालक के पद का प्रभार सरकार ने दे रखा है, लेकिन जब डिप्टी डायरेक्टर से संयुक्त संचालक बनने की उनकी बारी आर्इं, तो विभागीय जांच (डीई)आडेÞ आ गई। सूत्र बताते है कि उक्त महिला अधिकारी द्वारा की गई बड़बड़ियों की वजह से एक किसान की शिकायत पर यह जांच प्रारंभ की गई है। प्रमोशन मिलने से वंचित महिला अधिकारी आईएएस डायरेक्टर के पास अपनी बात रखने पहुंचीं और रोने लगी? वैसे डायरेक्टर ने उनकी पूरी बात सुनी और कहा-मैं इस बारे में कुछ नहीं कर सकता है। इस मामले में मंत्रालय में बात करें। गौरतलब है कि जब उक्त महिला अधिकारी भोपाल में पदस्थ थीं, तब उन्होंने खूब चांदी काटी और इसके चलते उन्होंने खुद और अपनी बहन के नाम पर चल-अचल संपत्ति भी खरीदी। वर्तमान में उन्होंने भोपाल में लाखों की संपत्ति जुटा रखी है, जिसकी चर्चा करते डायरेक्टेÑट के अधिकारी थकते नहीं हैं?
...और इंजीनियर संवेदनहीन हो गए
मुख्य सचिव ने राजधानी की सड़कों की स्थिति को लेकर पिछले दिनों एक प्रमुख सचिव की क्लास ले डाली। पीएस ने भी आनन-फानन में विभागीय अधिकारियों के साथ राजधानी की सड़कों का निरीक्षण कर डाला। इस दौरान उन्होंने सड़कों पर गड्ढों और जलभराव की स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सड़क पर गड्ढे साफ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी उन्हें नहीं देख पा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि इंजीनियर संवेदनहीन हो गए हैं। पीएस ने स्पष्ट निर्देश दिए कि खराब सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां भी घटिया काम मिला, वहां संबंधित एसडीओ ही नहीं बल्कि कार्यपालन यंत्री तक को निलंबित किया जाएगा। पीएस ने राजधानी परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता से कहा कि अब आंकड़े नहीं, जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए। इस मामले में पीएस ने कुछ इंजीनियरों को सस्पेंड करने के भी निर्देश दिए, लेकिन उन्हें बचाने का काम चीफ इंजीनियर द्वारा किए जाने की चर्चा है।
राज्य सत्कार में अटके लाखों के पेमेंट
मप्र सरकार ने हाल ही में राज्य प्रशासनिक सेवा के एक अफसर को राज्य सत्कार अधिकारी नियुक्त किया है। इससे पहले ये महाशय पर्यटन बोर्ड में पदस्थ हुआ करते थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने राज्य सत्कार का काम संभाल वीआईपी और वीवीआईपी की यात्राओं के लिए होटल, वाहन और फूल-मालाओं पर खर्च होने वाली लाखों रुपए की राशि का पेमेंट अटका दिया। जबकि इसके पहले रहे सत्कार अधिकारी ने मार्च तक का पेमेंट करवा दिया था, लेकिन नए अफसर ने किन्हीं कारणों के चलते अप्रैल के बाद का टेÑवल्स आपरेटर, होटल संचालक और फूल-माला का व्यवसाय करने वालों का लाखों का भुगतान नहीं किया। सूत्र बताते है कि अकेले एक ट्रेवल्स संचालक का ही 30 लाख से अधिक का पेमेंट होना है। इसके लिए ट्रेवल्स संचालक बडेÞ अफसरों से सिफारिश भी लगवा चुका है, लेकिन राज्य सत्कार अधिकारी मामले को टालने में माहिर हैं। गौरतलब है कि ऐसे ही एक तत्कालीन अफसर ने करीब 6 करोड़ का घोटाला पेमेंट में किया था, जिसके कारण सरकार को उसे बर्खास्त करना पड़ा?
मंत्रियों ने बनाई पब्लिक से दूरी
मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने सभी मंत्रियों को सप्ताह में कम से कम एक से दो दिन मंत्रालय में बैठने के निर्देश दिए थे। साथ ही एक दिन गांव में रात्रि विश्राम करने के लिए भी कहा था, लेकिन अधिकांश मंत्री मुख्यमंत्री और सरकार के निर्देशों को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। इसके लिए भाजपा ने एक बीच का रास्ता निकालते हुए मंत्रियों को सप्ताह में एक दिन भाजपा दफ्तर में बैठकर कार्यकर्ताओं की समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए थे। हालांकि संगठन के निर्देश पर मंत्री भाजपा दफ्तर में तो बैठने लगे हैं, लेकिन यहां उनसे मिलने इक्का-दुक्का ही कार्यकर्ता आते हैं। इसकी अपेक्षा मंत्रालय में कार्यकर्ता नहीं, मंत्रालय में दूरदराज या मंत्री के क्षेत्र से लोग मिलने आते हैं। वैसे मंत्रियों ने क्षेत्र से प्रदेश की जनता से मिलने में दूरी बना रखी है और जैसे ही कैबिनेट मीटिंग समाप्त होती हैं, अधिकांश मंत्री अपने बंगलों पर पहुंच जाते हैं, जिससे बाहर से आने वाली जनता मंत्रालय में मंत्री से मिलने परेशान होती रहती हैं?

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