वन मुख्यालय में दो पीसीसीएफ के बीच में कोल्ड वॉर
भोपाल। वन मुख्यालय में दो सीनियर आईएफएस अफसरों के बीच कोल्ड वॉर शुरू होने की खबर है। इस वॉर का अंत कहां कैसे होगा, इसका उत्तर समय के गर्भ में छिपा है। इसकी शुरुआत 1993 बैच के आईएफएस की ओर से हुई। हालांकि आईएफएस की बिरादरी में इस अफसर की छवि दूसरों में ताक-झांक और खामियां निकालने की बनी हुई है। शायद यही वजह रही कि फील्ड से मुख्यालय तक जहां भी पदस्थ रहे, वहीं विवादों की सुर्खियों में ही रहे।
पिछले दिनों 1993 बैच के पीसीसीएफ महोदय ने 1991 बैच के अधिकारी को पत्र लिखकर उनको यह बताने की कोशिश की कि आपके शाखा अंतर्गत फील्ड में पकड़ने और छोड़ने का काम चल रहा है। उनका पत्र पढ़कर सीनियर पीसीसीएफ के चेहरा लाल-पीला होने लगा। सीनियर अफसर ने जूनियर पीसीसीएफ को उनकी ही भाषा में लौटती डाक से जवाब भी भेज दिया। वन मुख्यालय और फील्ड के अफसर तो समझ गए होंगे कि ये महाशय कौन है? हां, इतना जरूर संकेत देना चाहूंगा कि ये महाशय जब संरक्षण थे तब इनके कार्यकाल में इटारसी रेंज के एक बीट में 2 करोड़ 82 लाख की कीमत की सागौन के टीक कट गए और वे मुख्यालय में दूसरों की खामियां निकालने में व्यस्त रहे। बुंदेलखंड के एक जिले में इनके कार्यकाल में पकड़ने और छोड़ने का खेल खूब चला। आजकल वे जूनियर अफसरों को उनकी ऐनुअल अप्रेजल रिपोर्ट (सीआर) बिगाड़ने की धमकी देते हैं। इनके बारे यह भी कहा जाता है कि मालवांचल के केबिनेट मंत्री के खास हैं।

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