एल्डरमैन बनने का इंतजार कर रहे भाजपा के कार्यकर्ता
भोपाल । चुनावी मौसम आते ही भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को देवतुल्य बताकर उन्हें काम में झोंक देती है और दिलासा देती है कि आगे उन्हें संगठन या सत्ता में भागीदार बनाया जाएगा, लेकिन एल्डरमैन की नियुक्ति में ये बात पिछले 7 सालों से बेमानी साबित हो रही है। पिछला कार्यकाल भी बिना एल्डरमैन के आलोक शर्मा ने पूरा कर लिया था और अब महापौर मालती राय का आधा कार्यकाल भी एल्डरमैन के बिना पूरा हो चुका है। एल्डरमैन बनने की चाह में भाजपाई सत्ता और संगठन के नेताओं की ओर टकटकी लगाकर देखने को मजबूर हैं।
सभी चुनाव निपटे, लेकिन न पार्टी ने पहल की और न ही सरकार ने
2022 में नगर निगम चुनाव निपटने के बाद सरकार की ओर से घोषणा की गई थी कि सभी नगरीय निकायों में एल्डरमैन, यानी वरिष्ठ पार्षदों की नियुक्ति की जाएगी। इससे उन कार्यकर्ताओं को अवसर मिलते, जिन्हें या तो निगम चुनाव में टिकट नहीं मिला था या फिर जो वरिष्ठ हो चुके हैं। यही नहीं, सरकार ने भोपाल और इंदौर जैसे नगरीय निकायों में तो एल्डरमैनों की संख्या बढ़ाकर 12 कर दी थी। यानी इंदौर में एल्डरमैन बनाए जाते तो एक विधानसभा से दो वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को मौका मिलता। 12 एल्डरमैन की नियुक्ति का सुनकर कार्यकर्ताओं की बांछें भी खिल गई थीं और उन्हें लगने लगा था कि पार्टी अब उनकी मेहनत का परिणाम देगी, लेकिन ढाई साल बीतने के बाद अभी तक एल्डरमैन की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा चुनाव आए, तब भी संगठन की ओर से कहा गया कि जल्द ही चुनाव निपटने के बाद इन पदों पर नियुक्ति कर दी जाएगी, लेकिन न तो सत्ता की ओर से इस बारे में कोई पहल की गई और न ही संगठन की ओर से। चूंकि पिछले चार महीनों से संगठन पर्व के तहत सदस्यता अभियान और नियुक्तियों का दौर चल रहा है, इसलिए भी आने वाले एक-दो महीनों तक तो एल्डरमैन की चर्चा ही नहीं हो पाएगी, क्योंकि शहर और प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कार्यकारिणी तय होना है, उसमें भी समय लगेगा।

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