...और पीएस के अरमान ठंडे पडे
...और पीएस के अरमान ठंडे पडे
सीताराम ठाकुर एक महिला आईएएस के खिलाफ काफी समय से पीछे पडेÞ मंत्रालय के प्रमुख सचिव के अरमान ठंडेÞ पड़ते जा रहे हैं। हालांकि पीएस के इशारे पर ही महिला डायरेक्टर आईएएस को हटवाने के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। इस मामले में अधिकारियों के संगठन ने सीएस को भी ज्ञापन सौंपा, लेकिन महिला आईएएस ने पीएस के कारनामों सहित पूर्व संचालक द्वारा की गई कारगुजारियों को लेकर एक रिपोर्ट सीएस को भेज दी थी। इस रिपोर्ट में कलेक्टरों से लिए गए फीडबैक को भी शामिल कर दिया। इससे पीएस हलकान हो गए और अब वे अपने सहपाठियों से बोल रहे हैं कि महिला आईएएस ने उनके खिलाफ सीएस से शिकायत कर दी है। इस महिला आईएएस को ऊपर से कौन संरक्षण दे रहा है, जिसके चलते उसे हटाया नहीं जा सका। इस घटनाक्रम के बाद पीएस ही नहीं, बल्कि विभाग के अधिकारी भी महिला आईएएस के विरुद्ध शिकायत करने से बचते नजर आ रहे हैं, जिसकी चर्चा मंत्रालय में सुनाई दे रही है।
डीएफओं के अधिकार कम किए
प्रदेश के जंगलों में ‘राजा’कहलाने वाले डीएफओ के सरकार ने ‘पर’ कतर दिए हैं। अभी तक फील्ड के डीएफओ अपनी मनमर्जी से काम करते थे और कलेक्टर द्वारा मीटिंग में बुलाए जाने पर अपने किसी अधीनस्थ को भेज दिया करते थे, लेकिन सरकार ने अब कड़ा निर्णय लेते हुए सभी 62 डीएफओ को आदेश दिया है कि वे कलेक्टर द्वारा बुलाई जाने वाली मीटिंग में खुद उपस्थित रहेंगे। साथ ही विभिन्न विभागों के मुद्दों को विशेषकर विकास कार्यों के संबंध में जिसमें वनभूमि प्रभावित हो रही है,संबंधित विभाग से त्वरित संपर्क कर उसका निराकरण करवाएंगे। सरकार के इस आदेश से आईएफएस अधिकारियों में हड़कंप देखा जा रहा है। खासकर फील्ड के अफसर कलेक्टरों की बिलकुल नहीं सुनते थे और इसके कारण कई बार फॉरेस्ट अनुमतियों के प्रकरण लंबित रहते थे, जिससे जिलों में विकास के काम प्रभावित होते थे, लेकिन अब डीएफओ सरकार के आदेश पर काम करने को मजबूर होंगें। इसे लेकर वन मुख्यालय में अफसरों के बीच खुसर-फुसर होने लगी है। क्योंकि पीएस के बदलते ही नए आदेश हुए हैं।
आईपीएस ने ‘जमीन’ का बिछाया खेल
एक एडीजी स्तर के आईपीएस अधिकारी ने इस समय मप्र ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में ‘जमीन’ का खेल शुरू किया है। कुछ समय पहले ही उक्त आईपीएस ने पांढ़र्ना में बड़ी संपत्ति खरीदी है और इस संपत्ति पर वे पोल्ट्री फार्म खोलने जा रहे हैं, लेकिन जिस स्थान पर उन्होंने जमीन खरीदी है, उसका कुछ हिस्सा महाराष्टÑ में भी आ रहा है और पोल्ट्री फार्म की अनुमति देने से महाराष्टÑ सरकार ने आपत्ति लगा दी है। सरकार का कहना है कि बिना सरकारी अनुमति के महाराष्टÑ की जमीन पर पोल्ट्री फार्म नहीं खोला जा सकता है। वैसे ‘कमाई’ वाले विभाग की कमान संभाल रहे इन आईपीएस महाशय ने इसके पहले बेंगलुरु में भी काफी संपत्ति जुटा रखी है और उसके जरिए ही वे फल-फूल रहे हैं। वैसे जिस विभाग में वे पदस्थ है, उसमें दोनों हाथों से ‘धन’ बटौरा जाता है। इसका कुछ हिस्सा सरकार से लेकर दिल्ली तक भेजा जाता है। यह अलग बात है कि इसका हिस्सा मंत्री तक भी पहुंचता है कि नहीं, लेकिन फील्ड से एक मुश्त पैसा वसूला जाता है? इसलिए साहब जगह-जगह निवेश कर संपत्ति जुटाने में लगे हुए हैं, जिसकी चर्चा पीएचक्यू में भी सुनाई देने लगी है।
महिला कलेक्टर का वीडियो वायरल
कुछ समय पहले ही एक जिले की कलेक्टर बनाई गर्इं महिला आईएएस का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। जिसे अब नए कार्यक्रम या मेले से जोड़कर वायरल किया जा रहा। इसमें महिला आईएएस डांस करते और गाना गाते नजर आ रही हैं। इसे पहले भी सोशल मीडिया पर साझा किया जा चुका है। इस वीडियो में महिला आईएएस कलेक्टर मशहूर फिल्म सीआईडी के लोकप्रिय गीत ‘लेके पहला-पहला प्यार’की प्रस्तुति करती नजर आ रही हैं, उनके साथ अन्य अधिकारी भी नजर आते हैं। दरअसल, ये केवल डांस का वीडियो नहीं, बल्कि कई महिला अधिकारियों की प्रतिभा को दिखाने वाला एक म्यूजिक वीडियो है। सूत्रों के अनुसार, इस वीडियो में 10 आईएएस और एसएएस से जुडेÞ सेवा के अधिकारी भी वीडियो में नजर आ रहे हैं। वैसे इस वीडियो को दो साल पुराना बताया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में 2015 बैच की आईएएस जिस जिले में कलेक्टर हैं, उन्हें उसके कुछ कार्यक्रमों में जोड़ दिया गया है। इससे महिला आईएएस की किरकिरी हो रही है?
मंत्री नपा अध्यक्ष के खिलाफ चला रहे मुहिम
सरकार के एक दमदार मंत्री और लोकल में एक नगर पालिका अध्यक्ष के बीच जमकर विवाद चल रहा है। मंत्री के इशारे पर ‘चीचली’के अध्यक्ष ‘सिंघानिया’को हटा दिया गया था, लेकिन कांग्रेस से जुडेÞ यह महाशय हाईकोर्ट से स्टे ले आए। क्योंकि इनकी पैरवी सुप्रीम कोर्ट के एक बडेÞ वकील कर रहे थे, जिसके कारण हाईकोर्ट ने उन्हें स्टे भी दे दिया, लेकिन मंत्री को ये ‘फूटी आंख भी नहीं सुहाते’, इसलिए अब स्थानीय नेताओं के माध्यम से भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकवा-शिकायतें प्रमुख सचिव और सचिव को करवाने में लगे हुए हैं? वैसे मंत्री खुद मौखिक रूप से सचिव से अध्यक्ष को हटाने के लिए बोल चुके हैं?, लेकिन जो चुना हुआ प्रतिनिधि हाईकोर्ट से स्टे लेकर आ गया है, यदि उसे हटाते है, तो कोर्ट की अवमानना का केस बनता है? और इससे नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी डरे हुए है। यहां तक कि सचिव भी मंत्री के लगातार दवाब की वजह से मजबूर हैं और वे एसीएस के समक्ष अपनी बात रख चुके हैं। अब देखना यह है कि मंत्री और नपा अध्यक्ष की इस लड़ाई में जीत किसकी होती है?

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