प्रशासनिक...गलियारा सीताराम ठाकुर, भोपाल 

सीएम को करना पड़ा इंतजार 

मप्र के इतिहास में यह पहला मौका है जब प्रशासनिक क्षेत्र में मुख्यमंत्री को किसी अफसर का इंतजार करना पड़ा हो? वैसे कैबिनेट हो या अन्य कोई प्रशासनिक और विभागीस मीटिंग, मंत्री और अफसरों को कई बार मुख्यमंत्री की व्यस्तता की वजह से उनके देरी से पहुंचने की वजह से इंतजार जरूर करना पड़ता है। लेकिन पिछले दिनों एक आला अधिकारी से मिलने के लिए मुख्यमंत्री को करीब 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। इससे पूरे प्रशासनिक हल्के में हड़कंप मच गया। खासकर डाक्टर साहब को कुछ मुद्दों पर उस आला अधिकारी से चर्चा करनी थी, जब अधिकारी सीएम हाउस पहुंचे तो करीब आधे घंटे तक सीएम ने अकेले में उनके साथ मीटिंग की। मंत्रालय में चर्चा है कि ऐसी मीटिंग और अफसर का इंतजार सीएम को बडेÞ साहब के लिए भी कभी नहीं करना पड़ा। ऐसे में चर्चा का माहौल गर्म है कि क्या वजह थी कि सीएम को भी अफसर से मिलने के लिए इंतजार करना पड़ गया? 

हाथों में लाल रंग रिश्वत ‘निधि’ का नहीं 

पानी से जुड़े एक विभाग में ख्वाहिशों को महकाने वाली सौंदर्य पर लोकायुक्त की टेढ़ी नजर पड़ गई।  लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत ‘निधि’ (धन) को पकड़ने के लिए मोहतरमा के हाथ धुलवाए, तो लाल रंग ने सच उगलवा दिया। ऊपर से दबाव इतना था कि मोहतरमा को सस्पेंड करना पड़ा। लेकिन इंजीनियरों की वजह से विभाग के प्रमुख साहब भी निधि पर इठलाए हुए थे और साहब का इस तरह के मामलों में पुराना रिकॉर्ड भी रहा है। शायद यही वजह है कि साहब अब रिश्वत निधि पर अभियोजन की स्वीकृति की फाइल डेढ़ साल से लटकाए बैठे हैं। अब तर्क दिया जा रहा है कि लाल रंग रिश्वत का नहीं था, बल्कि हाथों में मेहंदी लगी हुई थी। विभाग में चर्चा आम है कि अगर ‘निधि’ (धन) स्वयं अपने आलिंगन का न्यौता दे दे,अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन खुदा मेहरबान तो फिर कोई मोहतरमा का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता? 

छोटे नेता जी के आगे मंत्री-विधायक पस्त 

राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के बडेÞ शहरों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े तेजी से विकास हो रहे हैं। इन विकास कार्यों के कारण जमीनों के भाव भी आसमान को छू रहे हैं। ऐसी स्थिति में जमीन के रसूखदार सौदागर भी सक्रिय हैं। खासकर राजनीति से जुडेÞ लोग जमीनों की खरीद फरोख्त में लगे हुए हैं। इन्हीं में एक छोटे नेता जी की चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सत्तारूढ़ पार्टी से आने वाले छोटे नेता जी के पास भले ही बड़ा पद नहीं है, लेकिन वे अपनी चालबाजी से बड़े-बड़ों को पानी पिला रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि छोटे नेता जी संपर्क बनाने और उन संपर्कों का फायदा उठाने में माहिर माने जाते हैं। इन दिनों उन्होंने ‘सरकार’ को साध रखा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि राजधानी में जमीन के धंधों की धांधली का निपटारा अब उनके माध्यम से ही हो रहा है। इस कारण राजधानी के दो विधायक उनसे खार खाए हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि छोटे नेताजी के कारण उक्त दोनों विधायक के पांव तले जमीन खिसकने लगी है, क्योंकि दोनों की जमीनों के माहिर खिलाड़ी है। इनमें से एक मंत्री तो दूसरे मंत्री बनने की दौड़ में शामिल है। इसकी चर्चा भाजपा मुख्यालय में भी सुनी जा सकती है। 

ईमानदारी के फेर में भूले सांसद का प्रोटोकॉल

आईएएस अफसरों पर आधारित योग, ज्योतिष कई प्रकार की होती है। क्योंकि ये अपने हिसाब से ज्योतिष की परिभाषा गढ़ते हैं। जैसे हाथ की पांच उंगलियों की तरह। इन्हीं में से एक अंगूठा (बेहद ईमानदार) प्रकार वाले अफसर हाल ही में असहज स्थिति में फंसे। खासकर पानी वाले एक निगम की स्कीम का जायजा लेने दिल्ली से एक सचिव साहब आए थे। साहब वरिष्ठता निभाने में उनके साथ लगे रहे और कार्यक्रम स्थल पर एक घंटा देरी से पहुंचे। उधर, अफसरों के देरी से पहुंने की वजह से सांसद महोदय का पारा सातवें आसमान पर था। लेकिन नेता वही जो हर मौके को भुना ले। सांसद महोदय ने व्यंग्य कसते हुए अफसर के पैर छू लिए। अचानक हुए इस दृश्यक्रम से ईमानदार अफसर हक्के-बक्के रह गए। उन्हें समझ में ही नहीं आया कि सांसद जी ने नेतागिरी की रस्म निभाई है या अफसरों को जूता मारा है? क्योंकि उन्होंने अफसरों को प्रोटोकॉल का जो पाठ पढ़ा दिया?

आईएएस अफसरों का छलका दर्द

आईएएस सर्विस मीट में इस बार वेटरन अफसर बेहद नाराज दिखे। पहले तारीफों के पुल बांधे गए, फिर व्हाट्सएप ग्रुप में उपेक्षा और व्यथा सार्वजनिक हो गई। एक रिटायर्ड आईएएस ने लिखा-या तो वरिष्ठ अधिकारियों और उनके परिवारों को शामिल न किया जाए, या फिर औपचारिक कार्यक्रमों में उन्हें सम्मान दिया जाए। संघ के ढांचे में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता। दूसरे रिटायर्ड अफसर ने लिखा-वरिष्ठ सेवारत अफसरों और भोपाल में रह रहे कई रिटायर्ड अधिकारियों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। दोनों रिटायर्ड आईएएस की इन आलोचनाओं ने प्रशासनिक हलकों में नई बहस जरूर छेड़ दी है। क्योंकि आईएएस सर्विस मीट के दौरान रिटायर्ड आईएएस को भी बुलाने की परिपाटी है और कई बार इन्होंने पदक भी जीते हैं, जिसके कारण वर्तमान में पदस्थ आईएएस उनसे जलने लगे हैं।