लिपुलेख दर्रा खुलने से सीमा व्यापार में लौटेगी रौनक, स्थानीय कारोबारियों में उत्साह
पिथौरागढ़: भारत और तिब्बत के बीच सदियों पुराने पारंपरिक व्यापार को लेकर एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में स्थित ऐतिहासिक लिपुलेख दर्रा पूरे छह साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर से व्यापार के लिए खोला जा रहा है। कोरोना महामारी की पाबंदियों और सीमा पर उपजे विभिन्न हालातों के कारण साल 2020 से बंद पड़ा यह अंतरराष्ट्रीय मार्ग अब दोबारा चालू होने जा रहा है। इस फैसले से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के चेहरे खिल गए हैं, क्योंकि इस मार्ग के दोबारा शुरू होने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि दोनों देशों के बीच सीमा पर होने वाले आपसी व्यापार को भी एक नई जिंदगी मिलेगी।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भी बेहद खास
उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले में समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित लिपुलेख दर्रा भारत और तिब्बत के बीच व्यापारिक दृष्टिकोण से रीढ़ की हड्डी माना जाता है। व्यापार के साथ-साथ यह दुर्गम मार्ग हिंदुओं की पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भी सबसे प्रमुख और सुगम रास्तों में से एक रहा है। जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के मुताबिक, मार्ग को सुचारू करने के लिए स्थानीय व्यापारियों के नए सिरे से पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) और अन्य जरूरी प्रशासनिक तैयारियों को तेज कर दिया गया है। सीमा पर बसे गांवों के निवासियों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर बताया है।
लोकल सामानों को मिलेगा बाजार और बढ़ेगा रोजगार
इस ऐतिहासिक दर्रे के दोबारा खुलने से स्थानीय भोटिया और अन्य जनजातीय व्यापारियों को अपनी आजीविका सुधारने का बड़ा मौका मिलेगा। सालों से बंद पड़े इस रास्ते के कारण सीमावर्ती इलाकों में आर्थिक मंदी का माहौल था, लेकिन अब व्यापारी फिर से तिब्बती बाजारों में अपने पारंपरिक उत्पाद जैसे उत्तम दर्जे के ऊनी कपड़े, बेशकीमती पहाड़ी जड़ी-बूटियां, खास मसाले और हस्तशिल्प का सामान बेच सकेंगे। वहीं दूसरी तरफ से भी पारंपरिक सामानों की आवक शुरू होगी। स्थानीय जानकारों का मानना है कि इस व्यापारिक गतिविधि के दोबारा पटरी पर लौटने से सीमांत युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में पर्यटन को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।
तनाव के बीच शांति और सुरक्षा की नई पहल
पिछले कुछ सालों में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर उपजे सैन्य और कूटनीतिक तनाव को देखते हुए इस पुराने व्यापारिक मार्ग को फिर से खोलने के फैसले को बेहद अहम और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इसे दोनों देशों के बीच जमीनी स्तर पर विश्वास बहाली की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उच्च स्तरीय प्रशासन ने सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह मुस्तैद रहने और सीमा पर स्वास्थ्य जांच संबंधी पुख्ता इंतजाम करने के सख्त निर्देश दिए हैं, ताकि आने वाले समय में यह व्यापार बिना किसी बाधा के सुरक्षित और सुचारू रूप से चलता रहे।

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