'मोहम्मद अली' से फिर बने आयुष, पूजा-अर्चना कर परिवार का लिया आशीर्वाद
शामली: शहर के प्रतिष्ठित दवा व्यवसायी देवराज मलिक के इकलौते पुत्र आयुष मलिक ने एक बार फिर सनातन धर्म अपना लिया है। इस मामले को प्रमुखता से उठाने वाले बघरा स्थित योग साधना आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने पुष्टि की है कि आयुष ने स्वेच्छा से घर वापसी कर ली है। घर के मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए आयुष का एक दृश्य भी सामने आया है, जिसमें वह अपने परिजनों से आशीर्वाद लेते और मूल धर्म में लौटने की बात कहते दिख रहे हैं।
गौरतलब है कि मोहल्ला दयानंदनगर निवासी और केमिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष देवराज मलिक ने 6 जून को अपने बेटे के जबरन धर्मांतरण को लेकर मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि काजीवाड़ा निवासी जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी ने उनकी संपत्ति हड़पने की नीयत से आयुष को अपने प्रेमजाल में फंसाया और फर्जी निकाहनामा तैयार करवाकर उसका धर्म बदलवा दिया था।
आंदोलन की चेतावनी के बाद जागा था प्रशासन
दवा कारोबारी के बेटे के इस संवेदनशील मामले को लेकर जब हिंदू संगठनों ने तीखे आंदोलन और महापंचायत का ऐलान किया, तब जाकर प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। इसकी गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई दी थी।
बघरा आश्रम के स्वामी यशवीर महाराज ने चेतावनी दी थी कि यदि आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे संबंधित इलाके में हिंदू महापंचायत करेंगे। इस अल्टीमेटम के बाद पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई और एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की, जिससे संतुष्ट होकर महापंचायत स्थगित की गई थी। उत्तराखंड हिंदू रक्षा दल ने भी इस पर आंदोलन की चेतावनी दी थी।
स्वामी यशवीर महाराज का संदेश: "हम आयुष मलिक की सनातन धर्म में घर वापसी का हृदय से स्वागत करते हैं। पूरा समाज उनके इस फैसले के साथ है। इस अन्याय के खिलाफ जो मुहिम हमने शुरू की थी, वह आज सफल हो गई है। इसके लिए हम मुख्यमंत्री और शामली प्रशासन का आभार व्यक्त करते हैं।"
पिता बोले— संस्कारों की हुई जीत
बेटे की वापसी पर भावुक पिता देवराज मलिक ने कहा कि ईश्वर की असीम अनुकंपा, परिवार के स्नेह और पूर्वजों के संस्कारों की बदौलत उनके बेटे आयुष ने पुनः वैदिक परंपराओं को स्वीकार कर लिया है। वह अब नियमित पूजा-पाठ और धार्मिक आचरण के मार्ग पर लौट आया है। उन्होंने इस संकटकाल में साथ देने वाले सभी सहयोगियों का आभार जताया।
प्रशासनिक वक्तव्य: "सनातन धर्म में वापसी का यह निर्णय उनके परिवार का निजी मामला है। जहाँ तक धर्मांतरण के केस का सवाल है, पुलिस पूरी निष्पक्षता से जांच कर रही है। फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें दबिश दे रही हैं, जल्द ही सभी सलाखों के पीछे होंगे।"
— एनपी सिंह, पुलिस अधीक्षक
यह था पूरा घटनाक्रम
इस पूरे मामले की शुरुआत 4 जून को हुई जब स्वामी यशवीर महाराज ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया। इसके बाद 6 जून को शहर कोतवाली में देवराज मलिक की तहरीर पर जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम, भाई आसमोहम्मद, बहनें राहिल, सुमाइला, राबिया, हुमा कुरैशी, तौफीक उर्फ भोला, मौलवी मुनव्वर और दो अज्ञात मौलवियों के खिलाफ साजिश और जालसाजी का मुकदमा दर्ज हुआ। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 7 जून को मुख्य आरोपी चांदनी कुरैशी, उसके पिता और बाद में उसके फुफेरे भाई (सपा अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव) तौफीक उर्फ भोला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

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