आखिरकार मिल ही गई सीएस की कुर्सी
आखिरकार मिल ही गई सीएस की कुर्सी
सीताराम ठाकुर, मुख्य सचिव अनुराग जैन वैसे तो कई बार पांच-छह दिन के अवकाश पर जाते रहे हैं, लेकिन सीएस के ससुर साहब का निधन होने पर वे करीब 6 दिन के अवकाश पर गए हैं और पहली बार उन्होंने मुख्य सचिव का प्रभार किसी अन्य सीनियर आईएएस को दिया है। सीएस बनने से वंचित रहे 90 बैच के सीनियर आईएएस डॉ. राजेश राजौरा को आखिरकार सीएस की अतिरिक्त प्रभार मिल ही गया है और मंगलवार को कैबिनेट बैठक होने की वजह से सोमवार को वे मुख्य सचिव की कुर्सी पर भी बैठ गए। गौरतलब है कि अनुराग जैन के सीएस बनने से पहले राजौरा का नाम मुख्य सचिव बनने लगभग फाइनल हो गया था और अधिकारियों ने उन्हें बधाई देने की साथ गुलदस्ता भी भेंट कर दिए थे, लेकिन केंद्र सरकार से अनुराग जैन को ऐनवक्त पर सीएस बनाने और प्रस्ताव भेजने का फोन आने पर राजौरा हाथ मलते रह गए थे। करीब सवा साल बाद राजौरा को आखिकार सीएस की कुर्सी मिल गई और मुख्य सचिव की सूची नेमप्लेट में उनका भी नाम जुड़ गया है। रिटायरमेंट के बाद राजौरा पूर्व सीएस लिख सकेंगे?
चर्चा में साहब की पार्टी
प्रदेश का मालवा-निमाड़ क्षेत्र अपने अलग अंदाज के लिए जाना जाता है। यहां के लोग पार्टी फ्रेंडली होते हैं। इसका प्रभाव इस क्षेत्र में पदस्थ होने वाले ब्यूरोक्रेट्स पर भी इसका असर दिखता है। एक आईएएस अधिकारी तो इस रंग में इस कदर रंग गए हैंं कि उनकी पार्टियों में कभी-कभी सारी हदें पार हो जाती हैं। प्रशासनिक वीथिका में इन दिनों उक्त आईएएस अधिकारी और उनकी पार्टी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सूत्रों का कहना है कि उक्त आईएएस अधिकारी मालवा क्षेत्र के एक जिले में कलेक्टरी कर रहे हैं और सालों से जमे हुए हैं। हर वीकेंड पर साहब के दरबार में पार्टी सजती है। इस पार्टी में आईएएस, आईपीएस और राप्रसे के अफसरों के अलावा साहब के करीबी कारोबारी भी पहुंचते हैं। बताया जाता है कि उक्त पार्टी में वैसे तो खाने-पीने के साथ शराब भी परोसी जाती है, लेकिन कई अवसरों पर लोग अन्य तरह के नशे भी करने से परहेज नहीं करते हैं। दावा तो यहां तक किया जाता है कि कभी-कभी साहब की पार्टी का अंदाज रेव पार्टी की तरह नजर आता है। कई बार तो अफसर पार्टी में नशे में इतने चूर हो जाते हैें, जिसकी चर्चा मंत्रालय में भी सुनाई देने लगी है।
वेंडरों की जोड़ी ने की व्यवस्था ध्वस्त
भ्रष्टाचार के लिए ख्यात एक विभाग में 3 अफसरों और वेंडरों की जोड़ी के कारण पूरी व्यवस्था लड़खड़ा गई है। उक्त विभाग में सबकुछ वही होता है, जो ये लोग चाहते हैं। महिलाओं और बच्चों के पोषण के लिए काम करने वाले उक्त विभाग के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, कंसल्टेंट और ज्वाइंट डायरेक्टर तथा वेंडर मिलकर भ्रष्टाचार का जमकर खेल खेल रहे हैं। आलम यह है कि पिछले 12 साल से विभाग में आईटी एक्सपर्ट के रूप में बैठे एक व्यक्ति तो ऐसे है जो अंदर की सारी बातें लीक कर देते हैं। जिससे विभाग में कुछ ही वेडरों का दबदबा बना हुआ है। अभी हाल ही में विभाग ने साढेÞ अठारह करोड़ रुपए के टेंडर निकाले, जब इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि जिस सामग्री की खरीदी के लिए उक्त टेंडर निकाला गया, उनका बाजार मूल्य 8 से 10 करोड़ ही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिरकार बाकी रकम किसकी जेब में जाएगी? बताया जाता है कि विभाग के नए कमिश्नर को ज्यादा जानकारी नहीं है और उन्हें विश्वास में लेकर ही ये धोखेबाजी की जा रही है। अब देखना यह है कि कमिश्नर पूरी टीम को कैसे रिफॉर्म करते है?
दो मंत्रियों के जाने की तैयारी पूरी
सरकार से नाराज चल रहे मालवा एवं महाकौशल से आने वाले दो मंत्रियों का जाना अब तय माना जा रहा है। वैसे ये दोनों ही मंत्री हाईकमान के सामने अपनी बात रख चुके हैं, लेकिन हाईकमान ने उन्हें ‘वेट एंड वॉच’, इंतजार करने के लिए कहा है। खासकर ये दोनों ही मंत्री अपने-अपने विभाग के एसीएस और कमिश्नरों द्वारा इनके कोई भी काम नहीं करने की वजह से परेशान हैं और इस बात को लेकर उन्होंने प्रदेश के मुखिया को भी अपना दुखड़ा सुना दिया है, लेकिन मुखिया ने मंत्रियों की बात को तवज्जो नहीं दी, जिससे खफा ये मंत्री अपना इस्तीफा तक हाईकमान को देने पहुंच गए थे। अब देखना यह है कि मोहन सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार कब तक होगा और कितने नए मंत्री आएंगे और कितने पुराने मंत्रियों की छुट्टी होने वाली है, इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या इन मंत्रियों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इनमे से एक मंत्री ने काफी समय से कैबिनेट मीटिंग में भी नहीं आ रहे हैं और दूसरे मंत्री की नाराजगी जगजाहिर हो चुकी है। मंत्रालय में अब इन दोनों ही मंत्रियों के नामों की चर्चा है?
आईएएस की कार्यशैली से सीएमओ खुश
मुख्यमंत्री कार्यालय में समय के साथ कई अधिकारी आए और कई गए, हर किसी के काम करने का अपना तरीका होता है, लेकिन राज्य सेवा से प्रमोट होकर आईएएस बने अधिकारी की कार्यशैली ने अधिकारियों का मन जीत लिया है। साहब के व्यवहार में न तो पद को लेकर कोई रुतबा है और न ही सत्ता का रूआब। जबकि इसके पहले सीएमओ में पदस्थ रहे अधिकारी से तो प्रमोटी अफसर मिलने से भी डरते थे। वे दो-दो घंटे मिलने के लिए इंतजार कराया करते थे, लेकिन प्रमोटी अफसर की नेकनीयती और अपनापन अलग ही झलकता है। उनकी सहजता का आलम यह है कि बस एक फोन करिए और यदि संभव हुआ, तो काम फोन पर ही काम हो जाता है। इतना ही नहीं, यदि कहीं कोई अड़चन आए तो वे स्वयं फोन कर सूचित करते हैं और बड़े ही प्रेम से पूछते हैं कि आपका काम हुआ कि नहीं? खासकर राप्रसे से आने वाले अधिकारियों के काम तो ये चुटकियों में कर देते हैं, जिससे अधिकांश राप्रसे के अधिकारियों के नजर में ये हीरो बने हुए हैं। वैसे सीएमओ के साथ ही सरकार ने इन्हें मलाईदार विभाग का जिम्मा भी सौंप रखा है, लेकिन फिर भी ये हर रंग में ढल जाते हैं। चाहे सीएम हाउस हो या फिर सीएम सचिवालय हर जगह इनके नाम की चर्चा होने लगी है, क्योंकि एक समय ये ‘साहब’के जिले के एसडीएम जो रह चुके हैं?

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