10 या 11 मार्च कब मनाई जाएगी शीतला अष्टमी?
हिंदू धर्म में Sheetala Mata की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. खासकर त्वचा से जुड़ी बीमारियों से बचाव के लिए भक्त माता शीतला की आराधना करते हैं. इसी वजह से शीतला अष्टमी का पर्व धार्मिक के साथ-साथ स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
कब है शीतला सप्तमी और अष्टमी
वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 9 मार्च की रात 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होगी और 11 मार्च की रात 1 बजकर 54 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार 10 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी.
इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 6 बजकर 24 मिनट से शाम 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगा. वहीं 11 मार्च को बसोड़ा या शीतला अष्टमी मनाई जाएगी.
क्यों खाया जाता है एक दिन पहले बना भोजन
शीतला अष्टमी की खास परंपरा यह है कि इस दिन घरों में ताजा भोजन नहीं बनाया जाता. व्रत रखने वाली महिलाएं सप्तमी के दिन ही भोजन तैयार कर लेती हैं. अगले दिन उसी भोजन को माता का प्रसाद मानकर ग्रहण किया जाता है. इस परंपरा को बसोड़ा कहा जाता है.
बच्चों की रक्षा के लिए रखा जाता है व्रत
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. आनंद भारद्वाज के अनुसार यह व्रत खासतौर पर बच्चों की सेहत और रोगों से बचाव के लिए रखा जाता है. महिलाएं एक दिन पहले स्नान करके माता के लिए भोग तैयार करती हैं, जिसमें कढ़ी-चावल, पूड़ी, पकौड़ी और बरा जैसे व्यंजन शामिल होते हैं.
मंदिरों में उमड़ती है भक्तों की भीड़
शीतला अष्टमी के दिन शहर के देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है. भक्त माता शीतला की पूजा कर परिवार के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं.

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