नक्सल ऑपरेशन से ज्यादा निजी रिश्तों को लेकर चर्चा में रहे आईपीएस अधिकारी

...और खुल गई साहब की पोल 

सीताराम ठाकुर, भोपाल। एक आईपीएस अधिकारी अपनी बेवफाई के कारण खूब चर्चा में रहे। खासकर जिले में जितनी चर्चा नक्सल अभियानों की नहीं होती थी, उससे अधिक साहब की पराई महिला से प्रेम प्रसंग की होती थी। सूत्रों का कहना है कि साहब इश्कबाजी में इस कदर मशगूल हो गए थे कि उन्होंने अपनी पुलिस अधिकारी पत्नी को दरकिनार कर दिया था। लेकिन आईपीएस अधिकारी की अपनी पत्नी बेवफाई अब उन पर भारी पड़ने वाली है। बताया जाता है कि सरकार साहब की असली पत्नी की शिकायत पर उनके खिलाफ चार्जशीट देने जा रही है। सूत्रों का कहना है कि साहब का तबादला जब नक्सल प्रभावित रहे एक जिले में कप्तानी के लिए हुआ था, तो उस समय वे अपनी पूर्व की पदस्थापना वाली जगह से ही एक अन्य महिला को लेकर चले गए थे और उसे पत्नी का दर्जा देकर अपने पास रख लिया था। इस मामले को लेकर पहले तो पति-पत्नी में विवाद होता रहा, फिर थक-हारकर पत्नी ने मामले की शिकायत विभाग में कर दी। विभाग ने दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन साहब टस से मस नहीं हुए तो मामले की जांच कराई गई और साहब की पोल खुल गई,जिसकी चर्चा पीएचक्यू में सुनी जा सकती है। 

दिल्ली के दूत ने बढ़ाई मंत्रालय की धड़कनें

प्रधानमंत्री के सबसे पावरफुल सिपहसालार की पिछले हफ्ते हुई भोपाल यात्रा प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा में बनी हुई है। बताया जाता है कि साहब एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने भोपाल आए थे, लेकिन राजभवन (लोक भवन) में राज्यपाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी लंबी बैठक ने कई कयासों को जन्म दे दिया है। हालांकि मुलाकात का ब्यौरा ‘टॉप सीक्रेट’ रखा गया है, लेकिन कानाफूसी है कि दिल्ली के दूत ने राज्य की प्रशासनिक उठापटक की कुंडली खंगाली है। यही वजह है कि वल्लभ भवन की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। इसे नौकरशाही के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश माना जा रहा है कि सूबे के ‘परफार्मेंस’ पर दिल्ली की नजर 360 डिग्री तिरछी बनी हुई है। दिल्ली की नजरें कब तिरछी हो जाए, अफसर हलकान हैं। वैसे बडेÞ साहब को इससे नुकसान नहीं होने वाला, क्योंकि उन्हें तो एक साल और एक्सटेंशन मिलने की संभावना बनी हुई है। 

एमपी के अफसरों का ‘जमीनी’ पे्रम 

प्रदेश में पदस्थ आईएएस और आईपीएस अफसर जब भी अपनी अचल संपत्ति सार्वजनिक करते हैं तो उसमें उनका जमीन का प्रेम साफ दिखाई देता है। कोई मकान-दुकान में निवेश करता है तो कोई खेती-बाड़ी की जमीनों में। लेकिन इन दिनों दो ब्यूरोक्रेट्स अपनी खेती के कारण चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। इनमें से एक आईएएस तो दूसरा आईपीएस अधिकारी हैं। सूत्रों का कहना है कि इन अफसरों को चार इमली में जो शासकीय बंगले मिले हैं, वे अपनी साज-सज्जा नहीं बल्कि वहां हो रही खेती के लिए चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। बताया जाता है कि इन अफसरों ने बंगले के सामने खाली पड़ी जमीन को घेरे में लेकर और उक् त जमीन की खुदाई करवाकर उसकी मिट्टी में जैविक खाद डलवाई है। जिस पर दोनों अफसर खेती कर रहे हैं। मंत्रालय हो या पुलिस मुख्यालय जब भी अफसर आपस में बैठकर चर्चा करते है तो दोनों अधिकारियों के बंगले के सामने हो रही खेती का मुद्दा केंद्र बिंदु बना रहता है। सूत्र बताते है कि कई अफसर तो सुबह-शाम टहलने के नाम पर इन अफसरों की खेती का जायजा भी लेने जाते हैं। 

दलाल स्ट्रीट ने फिर बनाई साहब से करीबी

मंत्रालय हो या सत्ता के गलियारे, बिना ‘बिचौलियों’ के सब सूना रहता है। राजधानी की मुलाकातों के उजागर होने के डर से अब दलाल स्ट्रीट का नया ठिकाना ‘प्लेटिनम प्लाजा’ बन गया है। आलम यह है कि आयकर विभाग से लेकर ईडी तक यहां तांका-झांकी करती रहती है। एक रेड के समय यहां से 20 करोड़ रुपए नकद जब्त किए गए थे। इसी गली की सोहबत में एक साहब को पहले लूप लाइन की सैर करनी पड़ी थी। अब खबर है कि मां नर्मदा की सेवा में लीन एक अफसर ने प्रोफाइलिंग वाले साहब से ‘सेटिंग’ बिठाई और साहब को एक छोटा लेकिन इंडिपेंडेंट विभाग मिल गया। यह सुनते ही दलाल स्ट्रीट फिर से साहब के इर्द-गिर्द मंडराने लगी है। साहब को तो बस विटामिन-एम (माया) चाहिए, लिहाजा उन्होंने दलालों को सीधे अपने घर के किचन तक एंट्री दे दी है। गौरतलब है कि साहब का मन एमपी से ऊब चुका था, लेकिन दिल्ली की 360 डिग्री जांच में वे अनफिट पाए गए, जिसके कारण उनका दिल्ली जाना टल गया और यहीं पर वे अंधाधूंध रेवड़ी बटौरने में लगे हुए हैं, जिसकी चर्चा मंत्रालय में सुनाई दे रही है। 

मंत्री को पता नहीं और हो गई पोस्टिंग 

फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आरोपों चलते और इससे जुड़ा केस हाईकोर्ट में पेंडिंग होने तथा ईओडब्ल्यू द्वारा की जा रही एक मामले की जांच के बाद भी नगर एवं ग्राम निवेश संचालनालय में संयुक्त संचालक के पद पर ‘लिखार’ की पोस्टिंग का मामला अभी भी गरमाया हुआ है। आनन-फानन में इंदौर से हटाकर अधिकारी को मुख्यालय में पदस्थ करने के साथ ही भोपाल ननि का सिटी प्लानर बनाना किसी को रास नहीं आ रहा है। विभाग द्वारा की गई यह पोस्टिंग मंत्री को अंधेरे में रखकर हुई है। इसके लिए उच्च स्तर से नोटसीट लिखी गई और सीधे एक अधिकारी का तबादला कर दिया गया, जबकि सीएम समन्वय में ट्रांसफर की एकजाई सूची जारी की जाती है, लेकिन ‘लिखार’ के मामले में नियमों को दरकिनार कर पोस्टिंग करने और कराने के खेल में किस अफसर की भूमिका रही है, इसकी जांच-पड़ताल में बडेÞ अधिकारी लगे हुए हैं। वैसे इस ट्रांसफर के खेल में मंत्री ने खुद को पाक-साफ घोषित कर दिया है?, जिसकी चर्चा मंत्रालय में भी सुनी जा रही है।