भोपाल।  आर्थिक संकट से जूझ रही मप्र सरकार को नर्मदा घाटी विकास प्राधिकारण की 8 सिंचाई परियोजनाओं पर काम कराने के लिए नाबार्ड का सहारा लेना पड़ रहा है। इधर, अमले की कमी के चलते एनवीडीए राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे बजट को भी खर्च नहीं कर पा रहा है। यह स्थिति पिछले तीन-चार साल से बनी हुई है। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा पारित अवार्ड के तहत मप्र को दिसंबर 2024 तक 18.25 मिलियन एकड़ फीट पानी का इस्तेमाल करना था, लेकिन अभी एनवीडीए 12.98 मिलियन एकड़ फीट पानी का ही उपयोग कर पा रहा है, जबकि एग्रीमेंट की अवधि समाप्त हो गई है। बंटवारे के समय नर्मदा के 28 मिलियन एकड़ फीट पानी का चार राज्यों मप्र सहित गुजरात, महाराष्टÑ तथा राजस्थान को आंवटित किया गया था, लेकिन नर्मदा घाटी में लगातार अमला घटता जा रहा है। जबकि सदस्य अभियांत्रिकी, सदस्य पुनर्वास, सदस्य पर्यावरण, वित्त और ऊर्जा सहित मुख्य अभियंता के पांच पद स्वीकृत हैं और सभी वरिष्ठ17 पदों पर अतिरिक्त प्रभार देकर काम चलाया जा रहा है, जिसके चलते बजट खर्च से लेकर फील्ड में सिंचाई परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं। वैसे एनवीडीए द्वारा पूर्व से निर्मित 28 सिंचाई परियोजनाओं सहित 74 सिंचाई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। वहीं, 7 लाख हेक्टेयर में निर्मित क्षमता के विरुद्ध 2 लाख 24 हजार हेक्टेयर में ही सिंचाई करवा पा रहा है। ये आंकडेÞ दिसंबर 2024 तक के हैं। 

इनके लिए नाबार्ड से लिया कर्ज 
    परियोजना  -            स्वीकृत राशि  - प्राप्त राशि 

नर्मदा पार्वती-1-                             1131.53  -             1131.54 
  छीपानेर एमआईपी -                       298.24 -                257.93
  नर्मदा-झाबुआ  -                           1425.00 -              1396.04 
  नर्मदा पार्वती-2 -                            957. 51  -               957.51 
  डही एमआईपी   -                             952.13   -             743.94
 कालीसिंध चरण-2-                          2435.00 -             2435.00 
 चिंकी बोरास  बहु.-                           1200.00-                545.05 
 सांवेर एमआईपी   -                            800.00  -               00. 00 

कुल कर्ज -  9,199. 41 करोड़ 

खर्च नहीं कर पा रहे बजट 

एनवीडीए को वर्ष 2020-21 में 5 हजार 30 करोड़ का बजट मिला। इस साल 5 हजार 28 करोड़ खर्च किए। जबकि वर्ष 2021-22 में 6 हजार 917 करोड़ के एवज में 4 हजार 825 करोड़, 2022-23 में 7 हजार 793 करोड़ के एवज में 7 हजार 613 करोड़, वर्ष 2023-24 में 7 हजार 731 करोड़ के बदले 7 हजार 486 करोड़ और वर्ष 2024-25 में दिसंबर तक 8 हजार 474 करोड़ के बदले 5 हजार 630 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाया है। यानि बजट का पूरा पैसा भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। 

वित्त तय करता है लोन 

नाबार्ड से लिया गया कर्ज कम ब्याज राशि पर 50 साल के लिए लिया जाता है और इसका निर्धारण वित्त विभाग करता है। अलग-अलग परियोजनाओं के लिए पैसा लिया गया है, जो सरकार के मापदंड के तहत है। विभाग बजट का पूरा पैसा खर्च कर रहा है। 

डॉ. राजेश राजौरा, एसीएस एवं उपाध्यक्ष एनवीडीए