एमपी में आजादी की लड़ाई लड़ने वाले सेनानी चुनिंदा ही बचे, फिर भेदभाव लोकतंत्र सेनानी की मृत्यु पर ज्यादा राशि और राजकीय सम्मान की पात्रता
सीताराम ठाकुर, भोपाल देश की आजादी में लड़ाई लड़ने वाले मप्र के वीर सपूतों की संख्या प्रदेश में नाम मात्र 58 रह गई है, लेकिन इनसे ज्यादा सुविधा और सम्मान राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों को दे रही है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की मृत्यु पर अंत्येष्टि के दौरान सरकार सिर्फ 4 हजार रुपए की सहायता देती है, जबकि लोकतंत्र सेनानी की मृत्यु पर अंत्येष्टि के लिए 10 हजार की सहायता और अंत्येष्टि राजकीय सम्मान से की जाती है। यानि इसमें भेदभाव दिखाई दे रहा है। भारत देश में 1919 से लेकर 1946 आजादी की लड़ाई लड़ी गई। सरकार द्वारा इस लड़ाई में भाग लेने वाले वीर सपूतों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पदवी से नवाजा जाता है। आजादी की लड़ाई ही नहीं, बल्कि उसके बाद हुए कतिपय आंदोलनों यथा भोपाल राज्य का विलीनीकरण आंदोलन जो कि वर्ष 1949 में हुआ और 15 अगस्त 1955 को हुआ गोवा मुक्ति आंदोलन में भाग लेने वालों को भी केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की सूची में शामिल किया है। वर्तमान मप्र में ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की संख्या 58 बताई गई है। जबकि मीसाबंदी के दौरान जेल में बंद रहे लोकतंत्र सेनानियों की संख्या मप्र में 2710 है और दोनों ही सेनानियों को सिर्फ सम्मान निधि 30-30 हजार रुपए प्रति माह मिलती है, लेकिन अन्य सुविधाएं देने में सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ भेदभाव करती है।
मप्र में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की संख्या 23 हजार 433 है। इनमें से मप्र में इनकी संख्या 58 हैं। जिनके नाम है राज बहादुर सिंह, शील रानी जैन, रघुवीर चरण शर्मा, केशव दास दयारमानी, चंद्रभान राय, रमेशचंद्र मोर्य, रमेशचंद्र सेनी, हरीसिंह चौहान, भैया बहादुर सिंह, नाथुराम सुत्रकार, चंद्रावती सिंह, सत्रुघन शौभाराम चौहान, सुदर्शन कुमार महाजन, मूलचंद गिरोठिया, सावत्री देवी, रतीलाल मगनलाल शाह, रामबाबू शर्मा, महादेवी मिश्रा, कमलाकर दाबोदगांव, दत्तू देवकर, हीरालाल ताम्रकार, चंद्रा मेहता, मनोरमा गेहलोत, हबीब नाजर, नारायणी बाई, महबूब जहां, राम प्रसाद पाठक, ताराचंद जैन, सावत्री देवी वर्मा, गौरा सोनी, नारदिया बाई, श्यामलाल पाराशर, हरी प्रसाद, सुभद्राबाई मिश्रा, गुलाब बाई, जगजीत कौर, पार्वती बाई, जैमनिया देवी, मोरसी बाई मित्तल, सौंधिया बाई, राजेश्वरी बाई, किशनलाल सोनी, राम खैलावन पांडे, एपी सास्त्री, लक्ष्मीकांत मिश्रा, पार्वती देवी शास्त्री, लक्ष्मन बदरी, लक्ष्मीनारायण नायक, वल्लभ दास, राधाकिशन, बीएन बघेल, ग्याप्रसाद प्यासी, अवधेश प्रसाद शुक्ला, चंद्रवली प्रसाद शर्मा, जर्नादन प्रसाद शुक्ला, रामेश्वरी देवी तथा देवरती सिंह का नाम शामिल हैं।
लोकतंत्र सेनानी को ज्यादा सम्मान
मप्र लोकतंत्र सेनानी सम्मान नियम 2018 में लागू किए गए हैं, जिन्हें बाद 6 अक्टूबर 2023 को बदला गया है और नए नियम में ऐसे लोकतंत्र सेनानी जो एक माह से कम अवधि के लिए जेल में निरुद्ध रहे हो, उन्हें 10 हजार रुपए प्रति माह सम्मान निधि और एक माह से अधिक समय तक जेल में निरुद्ध रहे लोकतंत्र सेनानियों को सरकार 30 हजार रुपए माह सम्मान निधि दे रही है। इसके अलावा लोकतंत्र सेनानी की मृत्यु होने पर अंत्येष्टि के लिए 10 हजार रुपए तथा राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि करने का प्रावधान है, जबकि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की मृत्यु होने पर राजकीय सम्मान नहीं दिया जाता है। साथ ही 15 अगस्त और 26 जनवरी को आयोजित होने वाले राष्टÑीय पर्व के मौके पर लोकतंत्र सेनानियों को उचित सम्मान दिए जाने के निर्देश सरकार ने दे रखे हैं। मप्र में लोकतंत्र सेनानियों की संख्या जीएडी के अनुसार, 2710 है। संख्या ज्यादा होने के कारण नाम नहीं छापे जा सकते हैं।
सरकार का अपमानजनक रवैया
मप्र सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ अत्यंत भेदभावूपर्ण और अपमानजनक व्यवहार कर रही है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और मीसा बंदियों की अंत्येष्टि में अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो लोग देश की आजादी के लिए लडेÞ भाजपा सरकार के लिए उनका कोई महत्व नहीं है और जो लोग माफी मांगकर जेल में 10-15 दिन में ही पेरोल लिए सरकार उन्हें जनता के धन से सिर पर बैठा रही है। जबकि मप्र में सिर्फ 58 ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं, फिर भी उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।

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