भोपाल ।   भ्रष्टाचार के आरोपों में 15 आईएफएस अधिकारियों के खिलाफ अभी भी विभागीय जांच लंबित है। सालों चलने वाली डीई की वजह से 7 अफसर तो रिटायर हो चुके हैं, वहीं राज्य वन सेवा के एक दर्जन अधिकारियों के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार के मामले पेंडिंग हैं। उधर, विभागीय जांच का समय पर निर्णय नहीं होने की वजह से चार अफसरों को प्रमोशन का लाभ नहीं मिल सका। यह जानकारी वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने विधायक आतिफ आरिफ अकील के सवाल के लिखित जवाब में दी है। जिन अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में विभागीय जांच चल रही है, उनमें आईएफएस अधिकारी व्हीएन प्यासी, निजाम कुरैशी, आरएस सिकरवार, ओपी उचाड़िया, डीएस कनेश, डीएफओ व्हीएस होतगी, एम कालीदुर्रई, आरपी राय, सीएस निनामा, शैलेंद्र कुमार गुप्ता, डीएफओ किरण बिसेन, प्रशांत कुमार सिंह, देवांशु शेखर, नरेश कुमार दोहरे तथा वन संरक्षक अजय कुमार पांडेय का नाम है। इनमें से प्यासी, कुरैशी, सिकरवार, उचाड़िया, कनेश, कालीदुर्रई, राय, निनामा और गुप्ता रिटायर हो चुके हैं। गुप्ता हाल ही में सेवानिवृत्त हुए है, जबकि डीई पेंडिंग होने की वजह से डीएफओ व्हीएस होतगी, किरण बिसेन, प्रशांत  कुमार तथा देवांशु शेखर को वन संरक्षक के पद पर प्रमोशन नहीं दिया गया है। 

राज्य वन सेवा के इन अफसरों पर भी आरोप 

भ्रष्टाचार के आरोप में राज्य वन सेवा (एसीएफ) अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, उनमें सहायक वन संरक्षक आरके गुरूदेव, कैलाश वर्मा, आरएन द्विवेदी, मनीषा पुरवार, सुरेश कुमार अहिरवार, मनोज कटारिया, सुधीर सिंह, वाय एस परमार, सुधीर पाठक, केबी गुप्ता, अंतर सिंह ओहारिया तथा आईबी गुप्ता का नाम शामिल है।